Sonbhadra News : एक्शन में ओबरा चेयरमैन, अपने आदेश से ईओ को कर दिया कार्यमुक्त
क्या कोई चेयरमैन अपने लिखित आदेश से किसी अधिशासी अधिकारी (ईओ) को कार्य मुक्त कर सकता है, यह बहस पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया ट्रेंड कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जिला प्रशासन क्या कर रहा है।

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2:19 PM, January 30, 2026
शान्तनु कुमार/घनश्याम पांडेय
० दो ईओ के तैनाती मामले को लेकर चर्चा में ओबरा नगर पंचायत
ओबरा (सोनभद्र)। क्या कोई चेयरमैन अपने लिखित आदेश से किसी अधिशासी अधिकारी (ईओ) को कार्य मुक्त कर सकता है, यह बहस पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया ट्रेंड कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जिला प्रशासन क्या कर रहा है। दरअसल पिछले कुछ दिनों से नगर पंचायत ओबरा में ईओ के नियुक्ति को लेकर जिस तरह का उठापटक जारी है उससे न सिर्फ नगर के विकास पर प्रभाव पड़ रहा है बल्कि नगर पंचायत की छवि भी खराब हो रही है।
आपको बतादें कि पूर्व में नगर पंचायत ओबरा में अधिशासी अधिकारी (ईओ) के पद पर मधुसूदन जायसवाल तैनात थे। मगर 06 जनवरी 2026 को नगर विकास के विशेष सचिव सत्य प्रकाश पटेल ने अपने आदेश से मधुसूदन जायसवाल का स्थानान्तरण एटा जनपद के नगर पंचायत निधौली कला में करते हुए तत्काल कार्यभार ग्रहण करने का आदेश जारी किया था । मगर अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल एटा जनपद में कार्यभार ग्रहण न करके कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह दलील दी कि उनका स्थानांतरण मध्यकाल में कर दिया गया है जिससे ओबरा में पढ़ रहे उनके बच्चों की पढाई बाधित हो जायेगी। कोर्ट ने अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल का पक्ष सुनने के बाद स्थानान्तरण आदेश पर रोक लगा दी।
कोर्ट का स्थगन आदेश लेकर जैसे ही अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल ओबरा पहुंचे, नगर पंचायत अध्यक्ष ने वर्तमान में तैनात अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह को अपने पत्र से कार्य मुक्त कर दिया। यहीं से चर्चा शुरू हो गया कि क्या चेयरमैन को किसी अधिकारी को कार्य मुक्त करने का अधिकार है? आखिर चेयरमैन को पुराने ईओ को जॉइन कराने की जल्दबाजी क्यों हुई। इस पूरे प्रकरण में एक चर्चा और भी जन्म ले लिया कि अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल ने अपना जो फिटनेस सर्टिफिकेट लगाया है वह ओबरा के स्थानीय डॉक्टर का है जबकि लोगों का कहना है कि किसी सरकारी कर्मचारी को मेडिकल सर्टिफिकेट सरकारी अस्पताल का ही लगाना चाहिए।




