Sonbhadra News : अब रात के अंधेरे में नहीं बनेंगे मौत का कारण, पशुपालन विभाग आवारा पशुओं को पहना रहा 'रेडियम बेल्ट'
जिले में आवारा पशुओं के कारण लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग ने एक अभिनव और सराहनीय अभियान शुरू किया है। अब राज्यीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर....

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5:13 PM, August 3, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में आवारा पशुओं के कारण लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग ने एक अभिनव और सराहनीय अभियान शुरू किया है। अब राज्यीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर विचरण करने वाले आवारा मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट लगाए जा रहे हैं, ताकि रात के समय वाहन चालकों को दूर से ही उनकी मौजूदगी का आभास हो सके और संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि "वाराणसी-शक्तिनगर राज्यीय राजमार्ग सहित अन्य प्रमुख मार्गों पर पशु चिकित्सकों की टीम लगातार अभियान चलाकर सड़क किनारे बैठे अथवा विचरण कर रहे मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट पहनाने का कार्य कर रही है। वाहन की हेडलाइट पड़ते ही यह बेल्ट चमकने लगती है, जिससे चालक समय रहते सतर्क होकर वाहन की गति नियंत्रित कर सकते हैं।"
250 पशुओं तक पहुंचा अभियान -
सीवीओ ने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों के पशु चिकित्साधिकारियों और कर्मचारियों को अभियान में सक्रिय रूप से लगाया गया है। अब तक करीब 250 आवारा पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट लगाए जा चुके हैं। विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक पशुओं को इस अभियान से जोड़कर सड़क दुर्घटनाओं की घटनाओं में कमी लाना है।
बजट की कमी से धीमी पड़ रही रफ्तार -
हालांकि अभियान की राह में सबसे बड़ी बाधा बजट की कमी है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि सीमित संसाधनों के कारण प्रत्येक आवारा पशु तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, औद्योगिक इकाइयों, सामाजिक संगठनों और जनपद के संभ्रांत नागरिकों से आर्थिक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि समाज का सहयोग मिला तो जिले के सभी आवारा पशुओं को रेडियम बेल्ट पहनाकर सड़क सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।
सुकृत हादसे ने बढ़ाई चिंता -
हाल ही में सुकृत क्षेत्र में सड़क पर बैठे एक आवारा पशु को बचाने के प्रयास में बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दर्दनाक हादसे में एक बुजुर्ग सहित दो लोगों की जान चली गई। यह अकेली घटना नहीं है। जिले में आए दिन आवारा पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं, जबकि कई परिवार अपनों को खो चुके हैं। ऐसे हादसों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरसात में कई गुना बढ़ जाता है खतरा -
सीवीओ के अनुसार, बरसात के मौसम में सड़क किनारे पानी और कीचड़ भर जाने के कारण मवेशी अक्सर पक्की सड़कों पर आकर बैठ जाते हैं। रात के समय कम दृश्यता और तेज रफ्तार वाहनों के बीच ये पशु अचानक सामने आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। रेडियम बेल्ट इस जोखिम को कम करने की दिशा में एक प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।
पशुपालकों से भी की गई अपील -
जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने निजी पशुओं को खुले में न छोड़ें, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बांधकर रखें। अधिकारियों का कहना है कि सड़क पर छोड़े गए पशु न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी गंभीर खतरा बनते हैं।




