Sonbhadra News : सरकारी अस्पतालों में दलाल ही नहीं आशा भी मरीजों को पहुंचा रहे हैं प्राइवेट अस्पताल, घटना ने खोला राज
सोनू ने बताया कि म्योरपुर से आशा ने 20 हजार में पूरी डिलीवारी कराये जाने की बात कह कर राबर्ट्सगंज लायी थी। अब जब फोन कर रहे हैं तो अपशब्द बोल रही है।

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8:31 PM, October 23, 2026
शांतनु कुमार/प्रकाश खत्री
सोनभद्र । सरकारी अस्पतालों में दलाल ही नहीं आशा भी प्राइवेट अस्पतालों के लिए काम कर रहे हैं। लगातार दो घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी। जहाँ रामा हॉस्पिटल की घटना में यह बात सामने आया कि मेडिकल कॉलेज से दलाल रेफर के नाम पर सीधे रामा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया वहीं आज एक नये मामले में म्योरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी के लिए भर्ती महिला को लोढ़ी मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराये जाने के नाम पर ओम अस्पताल में भर्ती करा दिया।
सोनू ने बताया कि 14 अक्टूबर को सुषमा निवासी परारी, म्योरपुर को डिलीवारी के लिए म्योरपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहाँ एक आशा ने 16 अक्टूबर को लोढ़ी मेडिकल कॉलेज कहकर ओम अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहाँ उसी दिन प्रसव कराया गया। लेकिन अब डिस्चार्ज के समय 35 हजार का बिल थमा दिया। सोनू ने बताया कि म्योरपुर से आशा ने 20 हजार में पूरी डिलीवारी कराये जाने की बात कह कर राबर्ट्सगंज लायी थी। अब जब फोन कर रहे हैं तो अपशब्द बोल रही है।
सोनू की रिश्तेदार ने बताया कि वह खुद आशा के पद पर है लेकिन वे हमेशा लोढ़ी में डिलीवरी कराती हैं क्योंकि वहाँ सभी सुविधाएं मुफ्त है। आशा शिवांगी ने बताया कि उसकी रिश्तेदार को म्योरपुर की आशा ने धोखे से लोढ़ी बता कर ओम अस्पताल में भर्ती करा दिया। आशा ने बताया कि म्योरपुर की आशा ने 20 हजार लगने की बात कहकर यहाँ भर्ती कराया था लेकिन अब फोन करने पर आशा और उसके सहयोगी गाली-गलौज कर रहे हैं। शिवांगी ने बताया कि उनके रिश्तेदार गरीब हैं और उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनके रिश्तेदार के पास भाड़ा तक नहीं है, जो वे देंगी।
शुक्रवार को मामला उस समय बिगड़ गया जब परिजन भर्ती महिला और बच्चे को डिस्चार्ज कराने लगे। परिजन जब काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें 35 हजार का बिल थमा दिया गया। जब वे न दे पाने की बात कही तो वे डिस्चार्ज न कर पाने की बात कहने लगे।
मामला सज्ञान में आने के बाद नोडल गुलाब शंकर ने ओम अस्पताल के स्टाफ से बात किया, तब जाकर मामला हल हुआ।
कुल मिलाकर पिछले दो घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि सरकारी अस्पताल के लिए सिर्फ दलाल ही नहीं बल्कि आशा भी काम कर रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे भ्रष्ट आशा को चिंहित करने की भी होगी, जो तनख्वा तो सरकार से ले रही है लेकिन काम प्राइवेट अस्पतालों के लिए कर रही हैं।
बहरहाल म्योरपुर मामले में स्वास्थ्य विभाग क्या कार्यवाही करता है यह देखने वाली बात होगी।




