Sonbhadra News : नोडल को पता नहीं जिले में चल रही अवैध अस्पताल के खिलाफ छापेमारी
यूं तो सह नोडल अधिकारी का काम जिले में किसी भी छापेमारी व अन्य फील्ड वर्क करने के पहले उसकी जानकारी निजी अस्पताल पंजीयन नोडल अधिकारी को देकर जाना होता है मगर स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ भगवान भरोसे चल

sonbhadra
8:06 PM, January 11, 2026
शान्तनु कुमार
० स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों को खुश करने की परंपरा शुरू, सह नोडल का पद सृजित
० सूत्रों के मुताबिक छापेमारी में कंप्यूटर ऑप्रेटर से लेकर ड्राईवर तक होते हैं शामिल
० छापेमारी में नहीं होती लोकल पुलिस
० अस्पताल संचालक पत्रकारों को देते रहे धमकी, मूक दर्शक बनकर सुनते रहे सह नोडल अधिकारी
सोनभद्र। जिस तरह राजनीति में कई राज्यों में अपनों को खुश करने के लिए डिप्टी सीएम का पद सृजित कर दिया गया, इसी प्रकार अब जिले में अधिकारियों को खुश करने के लिए उनके नीचे एक नया पद सृजित कर दिया गया हैं। ताकि अधिकारी को उनका पूरा सम्मान मिल सके और वह अपने मन मुताबिक काम भी कर सके । ऐसा ही एक पद स्वास्थ्य विभाग में बनाया गया है जिसमें निजी अस्पताल पंजीयन नोडल के नीचे सह नोडल अधिकारी तैनात किया गया है। यूं तो सह नोडल अधिकारी का काम जिले में किसी भी छापेमारी व अन्य फील्ड वर्क करने के पहले उसकी जानकारी निजी अस्पताल पंजीयन नोडल अधिकारी को देकर जाना होता है मगर स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।
यह मामला उस वक्त खुला जब बभनी में अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों में गर्भपात व बच्चेदानी का ऑप्रेशन धड़ल्ले से हो रहा है। मामले की शिकायत हुई तो जिले से निजी अस्पताल पंजीयन सह नोडल अधिकारी गुरु प्रसाद अपनी टीम के साथ बभनी पहुंचे और वहां संजीवनी अस्पताल में छापेमारी की । छापेमारी की जानकारी अस्पताल संचालक को पूर्व में लग जाने की वजह से मरीज को वहां से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। बभनी में अवैध अस्पतालों का आलम यह है कि सीमेंट की दुकान का बोर्ड लगाकर अंदर बेखौफ तरीके से अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। जब पत्रकारों ने इस मामले को लेकर अस्पताल संचालक व सह नोडल अधिकारी गुरु प्रसाद से सवाल करना शुरू किया तो सह नोडल अधिकारी तो बागली झांकने लगे मगर अस्पताल संचालक पत्रकारों को धमकी देकर यह बताने की कोशिश करने लगे कि उनकी पहुंच ऊपर तक है और उसका कोई कुछ नहीं कर सकता। इस पूरे मामले पर जब जिले के निजी अस्पताल पंजीयन नोडल अधिकारी से बात किया गया तो उन्हें किसी मामले की जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी के द्वारा यह तो जानकारी मिली कि बभनी में टीम गई है लेकिन वहां पर क्या हुआ और किस अस्पताल संचालक ने पत्रकारों को धमकी दी इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है और ना ही उन्हें बच्चेदानी ऑपरेशन से जुड़े मामले की जानकारी है । कुल मिलाकर नोडल अधिकारी के बयान से यह साफ हो गया कि उन्हें सिर्फ जिले में एक पद पर बैठा दिया गया है और सह नोडल अधिकारी अपने टीम के साथ पूरे जिले में मनमानी तौर पर काम कर रहे हैं । यहां बड़ा सवाल यह है कि जब सीएमओ द्वारा जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है तो फिर सह नोडल अधिकारी बनाए जाने की जरूर क्यों पड़ी और फिर यदि जरूरत थी तो क्या सह नोडल अधिकारी अपनी कार्यो से नोडल अधिकारी को क्यों नहीं अवगत कराया। ऐसे में यह तो साफ हो गया कि जिले में ना तो कोई नियम कानून बचा है और नहीं अधिकारियों में तालमेल देखने को मिल रहा है । जिस तरीके से पूरे जनपद में अवैध अस्पतालों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है ऐसे में यह भी एक बड़ा सवाल है कि आखिर सीमेंट की दुकान के अंदर किसके शह पर अस्पताल चल रहा है ।
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भले ही बड़े-बड़े दावे व वादे करते हो मगर जमीनी हकीकत यह है कि जिले के स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है और और लोगों के जिंदगी के साथ हर दिन खिलवाड़ हो रहा है । मगर अधिकारी करवाई के नाम पर महज नोटिस या दिखावे के लिए सील कर देते हैं और फिर कुछ समय बाद वही अस्पताल एक बार फिर धड़ल्ले से संचालित होने लगता है । जिससे लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि पैसे वालों या ताकतवर लोगों की इस सरकार में सुनवाई है और उनके खिलाफ शिकायत करना अपनी जान को जोखिम में डालने के बराबर है ।



