Sonbhadra News : भुगतान नहीं, उल्टा वसूली! आशाओं ने दिया सीएमओ कार्यालय पर धरना
वर्षों से लंबित प्रोत्साहन राशि और पारिश्रमिक के भुगतान को लेकर शुक्रवार को आशा कार्यकर्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओ...

मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन करती आशाएं.....
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4:59 PM, April 10, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । वर्षों से लंबित प्रोत्साहन राशि और पारिश्रमिक के भुगतान को लेकर शुक्रवार को आशा कार्यकर्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष तारा देवी के नेतृत्व में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचकर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया और तत्काल लंबित भुगतान कराने की मांग उठाई। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार से फंड जारी होने के बावजूद उनका भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि भुगतान के नाम पर आशा कार्यकर्ताओं को डरा-धमकाकर अवैध वसूली की जाती है और शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।
तीन वर्षों से नहीं हुआ पारिश्रमिक का भुगतान -
वहीं जिला सचिव जानकी देवी ने बताया कि "आशा कार्यकर्ताओं द्वारा वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में योगदान दिया जा रहा है, लेकिन उनकी प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड और आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने में वर्ष 2018 से किए गए कार्य का आज तक एक भी पैसा नहीं मिला है। इसी तरह जुलाई 2019 से 31 दिसंबर 2021 तक राज्य वित्त से प्रति आशा व संगिनी को 750 रुपये मासिक की दर से घोषित 28 माह की प्रोत्साहन राशि भी अब तक लंबित है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रति माह 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी आशा कार्यकर्ताओं को नहीं मिली।"
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि "कुष्ठ रोग, टीबी, दस्तक और संचारी रोग अभियानों समेत कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लगातार काम करने के बावजूद उनकी प्रोत्साहन राशि वर्षों से अटकी हुई है। आभा आईडी (ABHA ID) के सृजन में 1 जनवरी 2023 से किए गए कार्य का भुगतान उसी तिथि से किया जाना था, लेकिन अब भुगतान 2024 से भी अधूरा और कम किया जा रहा है।"
दिनभर काम, आशाओं को सिर्फ 10 रुपये प्रतिदिन पारिश्रमिक -
धरना दे रहीं आशाओं ने बताया कि "दस्तक और संचारी अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उन्हें मात्र 10 रुपये प्रतिदिन की प्रोत्साहन राशि पर काम करने को मजबूर किया जाता है, जबकि इस कार्य में पूरा दिन घर-घर जाकर निरीक्षण और लोगों को जागरूक करने में लग जाता है।"
1090 करोड़ आवंटन के बावजूद नहीं मिला पैसा -
आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि "वर्ष 2024-25 की बकाया प्रोत्साहन राशियों के भुगतान के लिए करीब 1090 करोड़ रुपये का आवंटन पहले ही जारी किया जा चुका है, इसके बावजूद अधिकांश आशा कर्मियों को भुगतान नहीं मिला। जहां कहीं भुगतान हुआ भी है, वहां भारी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।"
सीएससी में भुगतान का विवरण नोटिस बोर्ड पर करें चस्पा -
उन्होंने यह भी कहा कि भुगतान की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शासन के निर्देशों के बावजूद किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भुगतान का विवरण नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक नहीं किया जाता।
भुगतान नहीं हुआ तो दुबारा करेंगी हड़ताल -
वहीं आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द से जल्द सभी लंबित भुगतान नहीं किए गए तो वो दोबारा हड़ताल करने को विवश होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी।
ये रही मौजूद -
इस दौरान रिजवाना, तारा देवी, मीरा देवी, सुमित्रा, कृष्णावती, शिल्पा, प्रभावती, अमृता, उर्मिला, सिंधु, रेनू, श्रद्धा, तारा, बिमला, सुनीता, इंद्रावती, संगीता, बबिता, आस्था, सविता, नेहा, सीता देवी, चंचला, कोमल, रजदेई, गीता, रेनू सहित बड़ी संख्या में आशाएं मौजूद रही।
ये है प्रमुख मांगें -
1. वर्ष 2024–25 की कमिटेड प्रोत्साहन राशियों का पारदर्शिता के साथ भुगतान।
2. वर्ष 2025–26 में किए गए सभी कार्यों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
3. आभा आईडी सृजन का भुगतान 1 जनवरी 2023 से किया जाए।
4. सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भुगतान का पूरा ब्यौरा नोटिस बोर्ड पर चस्पा किया जाए।
5. भुगतान के नाम पर आशा कार्यकर्ताओं से की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए सर्कुलर जारी किया जाए।
6. दस्तक व संचारी अभियान की प्रोत्साहन राशि का पुनरीक्षण कर उसे दैनिक मजदूरी के बराबर किया जाए।
7. 2019 से 2023 तक की राज्य वित्त से बकाया 750 रुपये मासिक की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए।



