Sonbhadra News : न सूचना, न सहमति, न हस्ताक्षर...फिर कैसे बदल गया जमीन का अंश निर्धारण, लेखपाल की कार्यशैली पर भड़के खातेदार
राबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के मधुपुर गांव में संयुक्त भूमि के अंश निर्धारण को लेकर विवाद गहरा गया है। भृगुनाथ, अजय पाल, विजय पाल, संजय कुमार पाल समेत अन्य सहखातेदारों ने तत्कालीन लेखपाल संजीव......

कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने जाते किसान...
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3:29 PM, September 5, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• मामला पहुँचा डीएम दरबार
सोनभद्र । राबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के मधुपुर गांव में संयुक्त भूमि के अंश निर्धारण को लेकर विवाद गहरा गया है। भृगुनाथ, अजय पाल, विजय पाल, संजय कुमार पाल समेत अन्य सहखातेदारों ने तत्कालीन लेखपाल संजीव श्रीवास्तव पर विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर बिना जानकारी दिए अंश निर्धारण करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें न तो अंश निर्धारण की प्रक्रिया की जानकारी दी गई और न ही उनके हस्ताक्षर कराए गए। बाद में खतौनी की नकल निकलवाने पर कथित गड़बड़ी की जानकारी हुई।
पीड़ितों भृगुनाथ और संजय कुमार पाल के मुताबिक, मधुपुर मौजा स्थित आराजी संख्या 954, 955 और 961 की कुल भूमि संयुक्त रूप से सहखातेदारों के नाम दर्ज है। इन आराजियात का अभी तक विधिवत अंश निर्धारण नहीं हुआ था और परिवार के लोग आपसी बंटवारे के आधार पर खेती-बारी करते चले आ रहे थे। आरोप है कि करीब एक माह पूर्व तत्कालीन लेखपाल ने विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर अंश निर्धारण कर दिया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सजरा वंशावली के अनुसार उनका आधार हिस्सा आधा यानी 1/2 होना चाहिए था, लेकिन कथित तौर पर उन्हें महज 1/4 हिस्सा निर्धारित कर दिया गया। उनका दावा है कि उनके हिस्से की भूमि का एक बड़ा भाग दूसरे पक्ष के खाते में कर दिया गया। इससे उन्हें आर्थिक और कानूनी नुकसान होने की आशंका है।
पीड़ितों का कहना है कि अंश निर्धारण के दौरान तत्कालीन लेखपाल ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया और न ही उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी। कथित तौर पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए। तहसील से खतौनी की नकल लेने के बाद जब उन्हें अंश निर्धारण की जानकारी हुई तो उन्होंने तत्कालीन लेखपाल से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी बीच लेखपाल का स्थानांतरण भी हो गया।
वर्तमान लेखपाल कन्हैया कुमार से शिकायत करने पर भी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होने का आरोप पीड़ितों ने लगाया है। उनका कहना है कि यदि गलत तरीके से निर्धारित हिस्से के आधार पर विपक्षी पक्ष ने जमीन किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में बेच दी तो विवाद और मुकदमेबाजी की स्थिति पैदा हो सकती है।
पीड़ित भृगुनाथ ने बताया कि "जमीन पुश्तैनी और संयुक्त है।बिना हमें बताए और बिना हमारी सहमति के अंश निर्धारण कर दिया गया। वंशावली के अनुसार हमारा हिस्सा आधा बनता है, लेकिन खतौनी में उसे घटाकर चौथाई कर दिया गया। हमें आशंका है कि हमारे हिस्से की जमीन पर भी दूसरे पक्ष को अधिकार देने की कोशिश की गई है।"
वहीं, उनके पुत्र संजय कुमार पाल ने कहा कि "हमें अंश निर्धारण की कोई जानकारी नहीं दी गई। जब खतौनी निकलवाई तब पूरे मामले की जानकारी हुई। यदि समय रहते इसमें सुधार नहीं हुआ तो विपक्षी जमीन बेच सकता है और बाद में हमें वर्षों तक मुकदमेबाजी करनी पड़ सकती है।"
पीड़ितों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सजरा वंशावली एवं राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कराने तथा कथित गलत अंश निर्धारण को निरस्त कर वास्तविक हिस्सेदारी निर्धारित कराने की मांग की है। साथ ही भूमि को किसी तीसरे व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने की आशंका को देखते हुए दोषी लेखपाल के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की गुहार लगाई है।




