Sonbhadra News : UGC और आरक्षण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं, स्वर्ण समाज ने कर दिया बड़ा एलान
सम्मेलन में आरक्षण के आधार पर विचार करने और सामाजिक समानता से जुड़े मुद्दों के लिए आयोग के गठन की मांग उठाई गई।वक्ताओं ने SC-ST एक्ट के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने और इसमें आवश्यक संशोधन की मांग रखी।

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10:32 PM, September 20, 2026
शांतनु कुमार/राकेश चौबे
सोनभद्र । विधानसभा चुनाव के पहले सवर्ण महासम्मेलन ने सरकार सहित सभी दलों की नींद उड़ा दी है। आरक्षण हटाने और समानता की मांग को लेकर आज रावर्ट्सगंज के रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। सबसे खास बात यह थी कि इस महासम्मेलन में सभी दलों के स्वर्ण समाज लोग मौजूद थे।
सोनभद्र में आयोजित सवर्ण महासम्मेलन में सामाजिक अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी स्तर पर बनाई जा रही समितियों और उनके माध्यम से किए जा रहे कार्यों की समीक्षा होनी चाहिए। आरक्षण व्यवस्था में लागू नियमों को लेकर भी वक्ताओं ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए।
सम्मेलन में आरक्षण के आधार पर विचार करने और सामाजिक समानता से जुड़े मुद्दों के लिए आयोग के गठन की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने और इसमें आवश्यक संशोधन की मांग रखी।
नीतीश पांडे ने कहा कि यह सम्मेलन किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य सर्व समाज के हितों और अधिकारों की बात को एक मंच से उठाना है। उन्होंने कहा कि UGC का मुद्दा जो कोर्ट में विचा रा धीन है उस पर कोई संशोधन न किया जाय, इस पर रोक लगाई जाय। ST/SC कानून में सुधार किया जाइ, क्योंकि लोग इसे व्यापार बना लिए हैं। यहाँ सर्व समाज के हित की बात की जा रही है।
वहीँ रचना तिवारी ने कहा कि जो कानून बनाये गए हैं उससे स्वर्ण समाज का उत्पीडन हो रहा है। सवर्ण समाज के सम्मेलन में पांच मांगों को रखा गया। जिसमें आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग प्रमुख रही।
सम्मेलन में आरक्षण से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने और सरकार की ओर से श्वेतपत्र जारी करने की मांग भी उठाई गई। कई वक्ताओं ने SC/ST से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी से पहले जांच की व्यवस्था किए जाने की मांग रखी ।
आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज की समस्याओं और अपेक्षाओं को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखना है। सम्मेलन में समान अवसर, सामाजिक संतुलन और नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा को लेकर चर्चा की गई।
कुल मिलाकर UGC और आरक्षण का मुद्दा सरकार ही नहीं विपक्षी दलों के लिए भी गले की हड्डी बनती जा रही है। चुनाव के पहले राजनीतिक दलों के लिए यह मामला न निगलते बन रहा और न उगलते।




