Sonbhadra News : 10 अगस्त को मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, 9.18 लाख बच्चों-किशोरों को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल की खुराक
जिले में बच्चों और किशोर-किशोरियों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। अभियान के तहत एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 9.18 लाख बच्चों व किशोर........

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10:46 AM, August 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में बच्चों और किशोर-किशोरियों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। अभियान के तहत एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 9.18 लाख बच्चों व किशोर-किशोरियों को एल्बेंडाजोल की खुराक खिलाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी है। अभियान का उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाने के साथ उन्हें पोषक तत्वों का पूरा लाभ दिलाना, एनीमिया का जोखिम कम करना और उनके स्वस्थ शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा देना है।
स्कूल जाने वाले और छूटे बच्चों पर भी रहेगी नजर -
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि "अभियान का लक्ष्य जिले के प्रत्येक पात्र बच्चे तक पहुंचना है। इसमें केवल विद्यालय जाने वाले बच्चे ही नहीं, बल्कि स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि कोई भी पात्र बच्चा दवा की खुराक से वंचित न रह जाए।"
2747 विद्यालयों और 2079 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलेगा अभियान -
जिला क्षय रोग अधिकारी एवं अभियान के नोडल अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने बताया कि "जिले में 91894 बच्चों को 2747 विद्यालयों और 2079 आंगनबाड़ी केंद्रों पर एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। अभियान के दौरान जो बच्चे किसी कारणवश खुराक लेने से छूट जाएंगे, उन्हें 14 अगस्त को आयोजित होने वाले मॉप-अप दिवस पर दवा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि गोली को चबाकर खाना चाहिए, जबकि छोटे बच्चों को आवश्यकता के अनुसार गोली को कुचलकर खिलाया जा सकता है।"
गंदगी, दूषित पानी और भोजन से बढ़ता है संक्रमण -
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कृमि आंत में रहकर शरीर के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचाते हैं। खुले में शौच, गंदे हाथ, दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन संक्रमण के प्रमुख कारण बन सकते हैं। गंभीर कृमि संक्रमण की स्थिति में बच्चों में पेट दर्द, दस्त, उल्टी, एनीमिया, कुपोषण और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। खास बात यह है कि कई बार संक्रमण के लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। ऐसे में नियमित रूप से कृमिनाशक दवा की खुराक देना बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
किशोरियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण -
नोडल अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने बताया कि "कृमि संक्रमण से बचाव बच्चों के पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। किशोरियों के लिए यह अभियान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि किशोरावस्था में बेहतर पोषण आगे चलकर सुरक्षित मातृत्व की मजबूत नींव तैयार करता है। नियमित कृमिनाशक खुराक से शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों का बेहतर लाभ मिलने में मदद मिलती है और स्वस्थ विकास को बढ़ावा मिलता है।"
सिर्फ दवा नहीं, साफ-सफाई भी जरूरी -
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से कृमि संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की है। बच्चों के नाखून छोटे और साफ रखने, साफ पानी पीने, भोजन को ढककर रखने, फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाने तथा भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालने पर जोर दिया गया है। घर और आसपास सफाई रखने, चप्पल-जूते पहनने तथा खुले में शौच से बचने को भी संक्रमण रोकने के लिए जरूरी बताया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील : एक भी बच्चा न छूटे
सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि "राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के जरिए स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि जिले के प्रत्येक पात्र बच्चे और किशोर-किशोरी तक एल्बेंडाजोल की खुराक पहुंचाई जाए। उन्होंने अभिभावकों से भी अभियान में सहयोग करने और अपने बच्चों को निर्धारित दिवस पर कृमिनाशक दवा की खुराक दिलाने की अपील की है।"




