Sonbhadra News : जिले में 'मातृत्व' बना मौत का सौदा! निजी अस्पतालों की लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग ने साधी रहस्यमयी चुप्पी
आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई है। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची एक महिला और उसके नवजात की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की........

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sonbhadra
11:20 PM, June 18, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• फिर निजी अस्पताल ने दी नवागत सीएमओ को "मौत की सलामी"
• पति का आरोप- लापरवाही ने छीन ली पत्नी और नवजात की सांसें
• हंगामे के बीच अस्पताल का शटर गिराकर भागे कर्मचारी
• हर मौत के बाद होती है जांच, फिर फाइल बंद! आखिर किसे बचा रहा है स्वास्थ्य विभाग?
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई है। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची एक महिला और उसके नवजात की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जिले में आए दिन निजी अस्पतालों में इलाज और प्रसव के दौरान मौत के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन हर बार जांच के आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस बार केकराही स्थित एक निजी अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जमकर बवाल काटा।
ये है पूरा मामला -
घोरावल थाना क्षेत्र के पुरखास गाँव निवासी संतोषी (30 वर्ष) पत्नी रामजी इन दिनों अपने मायके करमा थाना क्षेत्र के टिकुरिया आई हुई थी कि मंगलवार को को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों द्वारा उसे केकराही स्थित मेडिसिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद जच्चा और नवजात दोनों की हालत बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। वहीं मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन जच्चा-बच्चा का शव लेकर वापस अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि हंगामा बढ़ता देख अस्पताल के कर्मचारी शटर गिराकर मौके से फरार हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक परिजन दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े रहे।
मेरी पत्नी और बच्चा हुआ लापरवाही के हुए शिकार -
मृतका के पति रामजी ने आरोप लगाते हुए कहा कि "उनकी पत्नी की हालत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल में समय रहते उचित इलाज नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि "वह अपनी पत्नी को सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल लेकर गया था, लेकिन वहां लापरवाही बरतते हुए झोलाछाप चिकित्सक से उसकी पत्नी का ऑपरेशन कराया गया, जिससे उसकी पत्नी और नवजात बच्चे की ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ गई और वाराणसी में उसकी मौत हो गई। अगर अस्पताल में सही इलाज और जिम्मेदारी से काम किया जाता तो आज मेरा परिवार उजड़ता नहीं। जब मौत हो गई तो अस्पताल वाले जवाब देने के बजाय शटर बंद कर भाग गए। आखिर मेरी पत्नी और बच्चे की मौत का जिम्मेदार कौन है?" वहीं पीड़ित पति रामजी ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।"
स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहे बड़े सवाल -
जिले में निजी अस्पतालों में लगातार सामने आ रही मौतों की घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसे अस्पतालों का निरीक्षण कौन कर रहा है? क्या इन अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक, आवश्यक उपकरण और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध हैं? यदि नहीं, तो इनके संचालन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई निजी अस्पताल मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे हैं और मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हर घटना के बाद जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती है।
नवागत सीएमओ के सामने पहली बड़ी परीक्षा -
हाल ही में कार्यभार संभालने वाले मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश कुमार मिश्रा के सामने निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। जिस विभाग को मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, उसी की निगरानी में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है।
जांच के आदेश, लेकिन कार्रवाई का इंतजार -
सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि "मामला संज्ञान में है और जांच के लिए निजी अस्पताल पंजीकरण के नोडल अधिकारी को निर्देशित किया गया है। हालांकि जिले की जनता अब केवल जांच नहीं, बल्कि दोषियों पर ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहती है।"




