Sonbhadra News : जिलाधिकारी दरबार में गूंजी प्रसूता के मौत की चीख, मेडिसिटी अस्पताल सीज, डॉक्टर और प्रबंधक पर FIR के आदेश
आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतें अब महज संयोग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने लगी हैं। केकराही स्थित एक निजी अस्पताल में.......

sonbhadra
6:18 PM, June 19, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतें अब महज संयोग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने लगी हैं। केकराही स्थित एक निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत ने उस भयावह सच को उजागर कर दिया है, जिसकी चर्चा लंबे समय से होती रही है। जिले में निजी अस्पतालों को पंजीकरण तो धड़ल्ले से बांट दिए गए, लेकिन यह जांचने की जहमत शायद ही कभी उठाई गई कि वहां योग्य सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और जीवनरक्षक सुविधाएं मौजूद भी हैं या नहीं। नतीजा यह है कि कई अस्पताल इलाज के केंद्र कम और मौत के अड्डे ज्यादा साबित हो रहे हैं। केकराही की घटना ने जिले के निजी हॉस्पिटलों की लापरवाह व्यवस्था का एक दर्दनाक और शर्मनाक उजागर कर दिया लेकिन उसी लापरवाह व्यवस्पीथा ने पीड़ितों को इंसाफ लिए दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया। वहीं इंसाफ की उम्मीद में भटकते परिजनों की पुकार जब जिलाधिकारी के दरबार तक पहुंची तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। जच्चा-बच्चा की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने केकराही स्थित मेडिसिटी हॉस्पिटल को तत्काल सीज करने तथा अस्पताल प्रबंधक और संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी कर दिया। डीएम के इस सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
स्टॉप नर्स ने बेहतर इलाज का दावा कर उन्हें भेजा था निजी हॉस्पिटल -
घोरावल थाना क्षेत्र के पुरखास गाँव निवासी संतोषी (30वर्ष) पत्नी रामजी पिछले कुछ दिनों से प्रसव के लिए अपने मायके करमा थाना क्षेत्र के टिकुरिया गांव में थीं। मंगलवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें जड़ेरुआ प्रसव केंद्र लेकर पहुंचे। मृतका के देवर सुनील का आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स चिंता देवी ने बेहतर इलाज का भरोसा देकर उन्हें केकराही स्थित मेडिसिटी हॉस्पिटल भेज दिया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते गर्भ में ही नवजात की मौत हो गई और कुछ ही देर बाद संतोषी की हालत भी बिगड़ने लगी।
आरोप है कि हालात बिगड़ते देख अस्पताल प्रबंधन ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बिना स्पष्ट जानकारी दिए प्रसूता को वाराणसी रेफर कर दिया। वाराणसी स्थित अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने संतोषी को मृत घोषित कर दिया। एक ही झटके में मां और नवजात की मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
इसके बाद जब परिजन दोनों शवों को लेकर मेडिसिटी हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां का नजारा और भी चौंकाने वाला था। अस्पताल का शटर बंद था और पूरा स्टाफ मौके से गायब हो चुका था। इससे आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
थाने से स्वास्थ्य विभाग तक, हर जगह निराशा -
मृतका के देवर सुनील ने आरोप लगाया कि उन्होंने करमा थाना में लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी घंटों तक मौके पर नहीं पहुंचे। देर रात पहुंचे एक अधिकारी ने अस्पताल सीज करने या कार्रवाई करने के बजाय परिजनों को अगले दिन सीएमओ कार्यालय आने की सलाह देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
डीएम के सामने फूटा दर्द, हुआ तुरंत एक्शन -
न्याय की आस में गुरुवार को पीड़ित परिवार कलेक्ट्रेट पहुंचा और जिलाधिकारी को पूरी घटना से अवगत कराया। परिजनों की व्यथा सुनकर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर ही सीएमओ को निर्देश दिया कि अस्पताल को तत्काल सीज किया जाए तथा अस्पताल प्रबंधक और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए।
डीएम के आदेश के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने पीएचसी केकराही प्रभारी डॉ0 गुरु प्रसाद को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद करमा थाना प्रभारी की मौजूदगी में मेडिसिटी हॉस्पिटल को सीज कर दिया गया।
मेरे बच्चे ने दुनिया देखने से पहले तोड़ दिया दम -
मृतका के पति रामजी का दर्द उस समय छलक पड़ा जब उन्होंने कहा कि "वह अपनी पत्नी को अस्पताल इसलिए ले गया था कि वह सुरक्षित प्रसव कर सके, लेकिन अस्पताल की लापरवाही ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया। उनका बच्चा दुनिया देखने से पहले ही मर गया और उनकी पत्नी भी उनसे छिन गई। इसलिए वह चाहते हैं कि दोषियों को ऐसी सजा मिले जो पूरे जिले के लिए नजीर बने, ताकि किसी और गरीब परिवार की जिंदगी इस तरह बर्बाद न हो।"




