Sonbhadra News : श्वांस रोग के इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा प्रणाली समय की जरूरत - डॉ0 एस0के0पाठक
वाराणसी स्थित ब्रेथ ईजी चेस्ट सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल द्वारा रॉबर्ट्सगंज स्थित "होटल अरिहंत" में एक NIMA के बैनर तले एक चिकित्सकीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

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10:15 AM, August 4, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
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सोनभद्र । वाराणसी स्थित ब्रेथ ईजी चेस्ट सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल द्वारा रॉबर्ट्सगंज स्थित "होटल अरिहंत" में एक NIMA के बैनर तले एक चिकित्सकीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में सोनभद्र व आस-पास के सम्मानित चिकित्सक शामिल हुए। इस चिकित्सीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता ब्रेथ ईजी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ0 एस0के0 पाठक मौजूद थे।
संगोष्ठी क़ो सम्बोधित करते हुए में डॉ0 एस0के0 पाठक ने बताया कि "आधुनिक पद्दति द्वारा चेस्ट एक्सरे को समझना, अस्थमा, टी0बी0, एलर्जी, खर्राटा व चेस्ट संक्रमण जैसे गंभीर बिमारियों के इलाज के बारे में चिकित्सको को जानकारी दी। श्वांस की बीमारी की चर्चा करते हुए बताया कि "साँस फूलने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमे अस्थमा, दमा, निमोनिया मुख्य हैं। इसके अलावा कभी-कभी खून की कमी (Anemia), हार्ट एवं किडनी की बीमारी की वजह से भी सांस फूल सकती हैं। अस्थमा में मरीजो को बार बार खांसी आना, सास फूलना, धुल-धुएं से एलर्जी, प्रायः कई बार छीक आना, बलगम के साथ कफ़ आना इत्यादि मुख्य लक्षण होते हैं। डब्लू0एच0ओ0 के अनुसार अस्थमा के कारण दुनिया में हर साल लगभग 2.5 लाख से ज्यादा लोगो की मृत्यु होती हैं। अस्थमा में मुख्यतः श्वांस नलियों में सूजन हो जाता हैं, जिसके कारण बाद में उन नालियों में सिकुडन भी हो जाता हैं, जो साधारण दवाइयों से नही ठीक हो पता हैं। इसके लिए एक विशेष प्रकार की थेरेपी का इस्तमाल किया जाता हैं, जिसे इन्हेलेशन थेरेपी कहतें हैं। अस्थमा की बीमारी फेफड़ो से सम्बंधित हैं, इसलिए इसमें इन्हेलेशन थेरेपी का ही उपयोग होना चाहिए जोकि सीधे फेफड़ो में जाकर अपना काम करती हैं, जिससे अस्थमा के मरीज को 2-3 मिनट में ही आराम मिल जाता हैं।"
डॉ0 एस0के0 पाठक ने बताया कि "एलर्जिक दमा को पता लगाने के लिए पी0एफ0टी0 द्वारा फेफड़े की कार्य-क्षमता के साथ-साथ एलर्जी की जाँच कराना भी अत्यधिक जरुरी होती हैं, जिससे एक चिकित्सक को अपने मरीज के बारे में यह पता चलता हैं कि कौन से एलर्जी के कारण मरीज की साँस को इम्युनोथेरेपि द्वारा वैकसीनेशन कराने में सहायता मिलती हैं।"




