इस दौरान ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि "मनरेगा कर्मचारियों एपीओ, लेखा सहायक, कम्प्यूटर आपरेटर, ग्राम रोजगार सेवकों का पिछले चार महीने से मानदेय भुगतान नहीं किया जा रहा है। दिपवाली व छठ पूजा जैसे महा पर्व पर भी मनरेगा कर्मचारियों को अल्प मानदेय नहीं मिल पाया। मानदेय न मिलने से मनरेगा कर्मी भूखमरी के कागार पर खड़े है। वह न तो बच्चों की फीस समय से जमा कर पा रहे हैं और ना ही बुढे माँ-बाप की दवा ला पा रहे हैं साथ ही दो वक्त रोटी के लिए भी लाले पड़ते दिख रहे हैं। पैसा ण होने से कार्यालय आने जाने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। मनरेगा कर्मचारियों का ईपीएफ सन् 2015 से कटकर जमा करने हेतु शासन द्वारा कई बार शासनादेश जारी किया गया है, जो कर्मचारियो के खाते से कट रहा है। लेकिन अभी तक पूर्ण रूप से जमा नहीं हो पाया है। हम फिल्ड वर्कर कर्मचारी है। यदि कोई दुर्घटना घट जाती है तो हमारे परिवार के लोग इसके लाभ से वंचित हो जाते है। इसलिए उन्होंने मांग किया कि 2015 से मनरेगा कर्मियों के खातो में कटे हुए धनराशि पूर्ण रूप से जमा किया जाए, मनरेगा कार्यों को लेकर अगर कोई वित्तीय अनियमित्ता पायी जाती है तो संविदा कर्मचारियों को दोषी मानकर कार्यवाही की जाती है जबकि उसके जिम्मेदार शासनादेशानुसार अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक माने गये है। इसलिए यदि कोई वित्तीय अनियमितता होती है तो जॉचोपरान्त जो दोषी हो उन पर कार्यवाही की जाए। यदि उनकी मांगे नहीं मानी गयी तो मजबूरन सविदा कर्मचारी आन्दोलन करने को बाध्य होगें।"