Sonbhadra News : मंत्री ने फीता काटकर किया 10 दिवसीय 'स्वदेशी मेले' का शुभारम्भ
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 की तर्ज पर स्वमी विवेकानन्द प्रेक्षागृह में लगाये गये 10 दिवसीय ‘‘स्वदेशी मेला‘‘ का राज्य मंत्री समाज कल्याण विभाग संजीव कुमार गोंड़ ने फीता काटकर शुभारंभ किया...

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10:58 PM, October 9, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 की तर्ज पर स्वमी विवेकानन्द प्रेक्षागृह में लगाये गये 10 दिवसीय ‘‘स्वदेशी मेला‘‘ का राज्य मंत्री समाज कल्याण विभाग संजीव कुमार गोंड़ ने फीता काटकर शुभारंभ किया।
इस मौके पर मंत्री संजीव गोंड ने उपस्थित जन मानस को सम्बोधित करते हुए कहा कि "हम सभी यहां स्वदेशी संकल्प के लिए एकत्रित हुए हैं। यह संकल्प एक नारा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव है। यह एक आह्वान है कि हम अपने देश में बने उत्पादों को अपनाए, अपनी संस्कृति को गले लगाएं, और अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी हमारा मंत्र है, हमारा लक्ष्य है, और हमारी शक्ति है। यह हमारे देश के कारीगरों, हमारे किसानों, हमारे छोटे व्यापारियों, और हमारे उद्यमियों के प्रति एक सम्मान है। जब हम स्वदेशी अपनाते हैं, तो हम अपने देश की मिट्टी से जुड़ते हैं, अपने लोगों की मेहनत को सम्मान देते हैं. और अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हैं। आज हमें आप सभी से स्वदेशी के संकल्प पर चर्चा करने का सौभाग्य मिला है। स्वदेशी केवल आर्थिक क्षेत्र में ही नहीं है, यह हमारी संस्कृति और आत्मा का हिस्सा है। हम विदेशी वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय अब अपनी जड़ों को पहचान रहे हैं। दुनिया में योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प, परंपरागत उद्योग, यह सब आज वैश्विक पहचान बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक सदी से भी अधिक पुराना स्वदेशी आदर्श, लोकमान्य तिलक, श्री अरबिंदो और महात्मा गांधी जी जैसे दूरदर्शी नेताओं के नेतृत्व में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक मार्गदर्शक शक्ति बना था।"
इस अवसर पर विधायक सदर भूपेश चौबे ने कहा कि "देश से स्थापित कुछ संघ संस्थाओं ने स्वदेशी को बढ़ावा देने में निरंतर अपना योगदान दिया है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने पश्चिमी विकास मॉडल और आयात पर निर्भर मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई, जिससे स्थानीय उद्योग कमजोर हुए और विदेशी निर्भरता बढ़ी। तभी वर्ष 1964 में दत्तोपंत ठेंगड़ी ने स्वदेशी चेतना को पुनर्जीवित किया। उन्होंने स्वदेशी प्रौद्योगिकी, कृषि और लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर यह दिखाया कि हमारा विकास हमारे हाथ में है। यही प्रेरणा आगे चलकर वर्ष 1991 में आत्मनिर्भर भारत के आंदोलन का आधार बनी जिसे आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया था। आज मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल अवसंरचना और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियान इसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। स्वदेशी, स्वभाषा और स्वभूषा तीनों मिलकर हमें याद दिलाती हैं कि हमारी शक्ति, हमारी संस्कृति और हमारी उद्योग-कुशलता ही हमें आत्मनिर्भर भारत की ऊंचाइयों तक ले जाएगी।"




