Sonbhadra News : खनन निदेशक ने दौरे के दूसरे दिन घटना स्थल का किया दौरा, डिस्पैच को ऑफलाइन से ऑनलाइन करने पर विचार
खनन निदेशक माला श्रीवास्तव ने दौरे के दूसरे दिन घटना स्थल का निरीक्षण करने कृष्णा माइनिंग वर्क्स पहुंचीं और उन्होंने वहाँ पहुंचकर घटना स्थल को देखा तथा अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया।

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8:06 PM, December 14, 2025
शान्तनु कुमार/घनश्याम पांडेय
ओबरा (सोनभद्र) । खनन हादसे के बाद अपने दो दिवसीय दौरे पर सोनभद्र पहुंची खनन निदेशक माला श्रीवास्तव ने दौरे के दूसरे दिन घटना स्थल का निरीक्षण करने कृष्णा माइनिंग वर्क्स पहुंचीं और उन्होंने वहाँ पहुंचकर घटना स्थल को देखा तथा अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। निरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर खनन उत्पादन के डिस्पैच को ऑफलाइन से ऑनलाइन करने पर विचार किया गया। खनन कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके बाद निदेशक ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक बैठक भी की। इसमें वन विभाग और प्रदूषण विभाग से संबंधित लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए। बैठक में क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने, खनिज उत्पादन में वृद्धि करने और निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। खनन कार्यों में सुरक्षा के महत्व को देखते हुए दक्ष कार्मिकों के माध्यम से ही कार्य कराने पर बल दिया गया। इसके अतिरिक्त खनन क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए। स्थानीय निवासी निर्भय चौधरी ने खनन कार्यों को मानकों के अनुरूप करने की मांग की।
मजदूरों के नाम पर चल रहा खनन
चाहे 2012 खनन हादसा हो या फिर 2025 की खनन हादसा, हर बार हादसे में बड़ी संख्या में मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी लेकिन विडंबना देखिये हर बार बंद खनन को चालू करने के लिए व्यापारियों को इन्हीं मजदूरों को आगे कर मांग करनी पड़ती है। रविवार को भी डाला व्यापार मंडल अध्यक्ष की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल खनन निदेशक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मांग की गयी की खनन कार्य बंद होने पर मजदूरों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गयी है। उन्होंने निदेशक को बताया कि यदि यही हाल रहा तो मजदूरों का पलायन शुरू हो जायेगा।
बड़ा सवाल तो यह है कि जिन मजदूरों के भरोसे सोनभद्र का खनन चल रहा है, क्या उन मजदूरों का दर्द कभी खनन व्यापारी समझ सका। खनन कार्य शुरू होते ही व्यापारी हमेशा की तरह पुरानी गलतियों को भुला देता है और फिर खनन दोहन में जुट जाता है। इस दौरान मजदूर उसके लिए सिर्फ एक मजदूर ही होता है। न उसके सुख सुविधा का ध्यान रखा जाता है और न मानकों का। और फिर हादसे के बाद फोड़ दिया जाता है अपनी गलतियों का ठीकरा किसी और पर।
कुल मिलाकर खनन फील्ड बन्द होने पर जितना दर्द सभी व्यापारियों को हो रहा है, उतनी चिंता यदि घटना के पहले की होती तो शायद घटना को रोका जा सकता था। ऐसे में व्यापारियों को भी कड़ा एक्शन लेने की जरूरत है ताकि मनमानी करने वाले खनन व्यापारियों को रोका जा सके। जिससे न सिर्फ खनन कार्य सुचारु रूप से चल सकेगा बल्कि मजदूरों की जिंदगी भी बच सकेगी।




