Sonbhadra News : 'दलाली' का अड्डा बना 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग, मरीज हो रहे आर्थिक शोषण का शिकार
देश के अति पिछले जिलों में शामिल सोनभद्र के गरीब मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल जैसी सुविधाएं मिल सकें इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीपीपी मॉडल पर 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग का संचालन.

sonbhadra
12:49 PM, September 30, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । देश के अति पिछले जिलों में शामिल सोनभद्र के गरीब मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल जैसी सुविधाएं मिल सकें इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीपीपी मॉडल पर 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग का संचालन शुरू कराया था लेकिन अब वह 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग अधिकारियों के अनदेखी की वज़ह से पूरी तरह दलाली का अड्डा बन चूका है। पहले तो वहाँ बाहरी दलाल रातोदिन चक्कर काटते थे और मौका मिलते ही मरीजों को निजी हॉस्पिटल में एडमिट करवा कर मोटा कमीशन कमाते थे लेकिन वर्तमान में बाहरी क्या कहें 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग के डॉक्टर ही दलाली के इस खेल में शामिल हो गए हैं।
ऐसे खुला प्रकरण -
बताते चलें कि गत 25 सितंबर को झारखण्ड निवासी महिला ने एमसीएच में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया लेकिन सांस लेने में तकलीफ के कारण एक नवजात को वहाँ के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ0जे0एस0गुप्ता ने हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया लेकिन मरीज हायर सेंटर के बजाय डॉ0 जे0एस0गुप्ता द्वारा संचालित उनके निजी अस्पताल स्वर्ण जयंती चौक स्थित केयर हॉस्पिटल में भर्ती मिला। भर्ती के तीसरे दिन ज़ब नवजात के पिता ने डॉक्टर से नवजात को डिस्चार्ज करने को कहा तो पहले तो डॉक्टर ने सीधे मना कर दिया फिर दबाव बनाता देख भारी भरकम बिल थमा कर तत्काल पैसा देने के बाद ही बच्चे को ले जाने की हिदायत दे दी। लगभग पाँच घंटे तक चली उठापटक के बाद पूरा पैसा जमा करने के बाद ही नवजात को डिस्चार्ज किया गया। जिसके बाद नवजात के परिजनों ने पुरे मामले की मुख्य चिकित्साधिकारी और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र के शिकायती माध्यम से अवगत कराते हुए जाँच कर उचित कार्यवाही की मांग की है।
दलाली के इस खेल में शामिल होने के लिए खोला स्वयं का निजी हॉस्पिटल -
एमसीएच में मरीजों की उपस्थिति और दलालों की कमाई देख अब धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर भी इस पेशे में जाने के लिए नए-नए हाथकंडे अपनाने लगे हैं। इसके लिए 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग के डॉक्टर पहले तो खुद के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में स्वयं के नाम पर निजी हॉस्पिटल का पंजीकरण कराते हैं। इसके बाद ये धरती के तथाकथित भगवान 'डॉक्टर' दलाली का असली खेल 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग में बैठे बैठे बड़े ही आराम से खेलते हैं और इसके लिए इन्हें बस काजगी कोरमा ही पूरा करना होता है। ये डॉक्टर मरीजों को गंभीर बताकर रेफर करते हैं और रेफर भी हायर सेंटर के लिए करते हैं लेकिन मरीज हायर सेंटर जाने के बजाय डॉक्टर साहब के निजी क्लिनिक में पहुँच जाता है और अपने कीमती सामान, घर, जमीन बेचने या रेहन रखने के बाद मोटी रकम चुकाता है उसके बाद ही वहाँ से डिस्चार्ज हो पाता है।
चुप्पी साधे रहते हैं जिले के स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी -
100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग पहले तो जिला अस्पताल के अधीन चलता था लेकिन जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज के अधीन होने से अब 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन होकर संचालित हो रहा है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा ज़ब 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग में दलाली के खेल को लेकर हाय तौबा मच रही है इसके पूर्व भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं लेकिन हर बार मुख्य चिकित्साधिकारी इसे पीपीपी मॉडल पर संचालित होने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं और यहाँ के स्टाप और डॉक्टर उनके इसी बात का फायदा उठाकर जिले के गरीब मरीजों का आर्थिक शोषण करते हैं।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पड़ रही गरीब मरीजों को भारी -
चुनावी दौर में बड़े-बड़े वादे, गरीबों के घर खाना खाने जैसा दिखावा करने वाले ये जनप्रतिनिधि बनने के बाद गरीबों की सुधि तक नहीं लेते और ये देखने के लिए कहीं और जाने की आवश्यता भी नहीं है, इसकी बानगी आपको जनपद सोनभद्र में आसानी से देखी जा सकती है। जनपद सोनभद्र से भाजपा के एक राज्यमंत्री सहित तीन विधायक, एक राज्यसभा सांसद हैं। यहीं नहीं खुद को मजबूत विपक्ष के नाम पर समाजवादी पार्टी से एक सांसद भी जनपद सोनभद्र का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन पीपीपी मॉडल का दौरा शायद ही कभी किसी जनप्रतिनिधि ने किया हो। सीएम योगी आदित्यनाथ ने निजी हॉस्पिटलों जैसी बेहतरीन सुविधाओं जिले के गरीब मरीजों को मिल सके इसके लिए पीपीपी मॉडल पर 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग का संचालन शुरू कराया था लेकिन जिले के जनप्रतिनिधियों को न तो गरीब मरीजों से और ना ही सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से कोई सरोकार नहीं रहता।
पुरे मामले पर ज़ब मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 अश्वनी कुमार से बात करने का प्रयास किया गया तो वो अनुपलब्ध मिले. लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
ऐसे में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की वज़ह से 100 शैय्या युक्त मातृ एवं शिशु विंग पूरी तरह से दलाली का अड्डा बन चूका है। गंभीर मरीज यहाँ से तो हायर सेंटर के लिए रेफर होता है लेकिन वह पहुंचता किसी ना किसी निजी अस्पताल ही है जहाँ उसका जमकर आर्थिक दोहन किया जाता है। वहीं मामले के खुलासे के बाद देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य चिकित्साधिकारी इस मामले में क्या कार्यवाही करते हैं या फिर अन्य मामालों की ही तरह इस मामले को जाँच के नाम पर उलझा दिया जाता है।




