Sonbhadra News :दासी मन्थरा ने कैकेई के भरे कान,कठोर वचन सुन मूर्क्षित हुए राजा दशरथ
महुली के आरबीएस मैदान पर चल रहे श्रीरामलीला के सातवें दिन मार्मिक प्रसंगों का किया गया मंचन

सोनभद्र
1:14 PM, October 7, 2024
धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)
विंढमगंज(सोनभद्र)। स्थानीय थाना क्षेत्र के राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली पर चल रहे श्रीरामलीला के सातवें दिन राम वनवास लीला का बड़ा ही मार्मिक ढंग से मंचन किया गया।रामलीला समिति के कलाकारों ने बिभिन्न चरित्रों के रूप में अपने भूमिका का लोहा मनवा दिया।
रामलीला के क्रम में अयोध्या में उत्सव का माहौल देख दासी मन्थरा को पता चलता है कि श्रीराम का राज्याभिषेक होने वाला है तो वह तुरन्त महारानी कैकेई के पास पहुँच कर महाराज दशरथ द्वारा दिए दो बचन को याद दिलाकर कहती है कि यह उचित समय है महाराज के दिए वचन को मांगने का।यही उचित अवसर है।श्रीराम का आज राज्याभिषेक होने वाला है।आपका पुत्र भरत राजा नही बन सकता।इसलिए भड़काते हुए कहती है कि दो वचनों में पहली भरत को राजगद्दी तथा दूसरी राम को चौदह वर्ष की बनवास का वर मांगना।यह सुनकर रानी कैकेई को क्रोध आता है परन्तु लालच भरी बातों को सुनकर महारानी कैकेई बहकावे में आ जाती हैं तथा अपने वचनों को मांगने हेतु रूठकर कोप भवन में चली जाती है।महाराज को इसकी खबर लगते ही महारानी कैकेई को मनाने कोपभवन में जाते हैं।वहाँ महारानी द्वारा कटु वचन सुन महाराजा मूर्छित हो जाते है।कैकेई ताना देते हुए कहते है कि रघुवंशी अपने दिए वचन नही भूलते।आपने ही तो वचन दिया था जिसे उचित समय देख मांग रही हूँ फिर दुख किस बात की?
राजा दशरथ कहते हैं कि "रघुकुल रीति सदा चलि आई,प्राण जाय पर वचन न जाई।,,
उधर पिता की आज्ञा पर प्रभु श्रीराम माता सीता के साथ वन को गमन करते हैं।
इसके अलावा वन गमन के समय अयोध्या वासियों का विरह जैसे अनेक दृश्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।व्यास गद्दी पर बैठे पंडित विवेकानन्द मिश्र ने छंद व चौपाइयों से मंचन को संगीतमय बना दिया।




