75 वर्षीय पुजारी कालिका प्रसाद ने बताया कि "कई कंपनियों ने इस पहाड़ी को अपने उपयोग में लाने की कोशिश की, लेकिन महादेव की महिमा से उनका प्रयास विफल रहा। एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए जिसके बाद गुफा का रास्ता खुला। गुफा के भीतर जहाँ भगवान गणेश, नंदी, महालक्ष्मी, महाकाली और महागौरी की प्राकृतिक शिलाओं के रूप में मूर्तियां भी पाई गईं, जिसके बाद यहां अनवरत पूजा अर्चना शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि शिव पार्वती की मूर्ति जमीन की कितनी गहराई से जुड़ी है इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिल पायी है क्युंकि शिव लिंग के ठीक नीचे एक बहुत ही गहरा गड्ढा भी बना हैजिसकी गहराई का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। वहीं उन्होंने बताया कि महादेव के ऊपर गिरने वाली जलधारा, जो सालभर बिना किसी स्रोत के गिरती रहती है, जैसे शिवलिंग पर जलहरी रखी हो. यह जलधारा कहां से आती है, इसका भी किसी को सटीक जानकारी नहीं है।"