Sonbhadra News : वन गमन के बाद श्रीराम-भरत प्रसंग सुन विभोर हुए श्रोता
नगर के आरटीएस क्लब मैदान में चल रहे श्री रामचरितमानस नवाह पाठ महायज्ञ के पांचवें दिन प्रभु श्री राम दरबार का भव्य श्रृंगार शिशु त्रिपाठी ने किया। इसके बाद समिति के अध्यक्ष सत्यपाल जैन एवं महामंत्री...

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5:38 PM, December 28, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• श्रद्धालुओं ने की श्री राम दरबार की मंगला आरती
• मानस पाठ के पांचवे दिन श्री राम दरबार का हुआ भव्य श्रृंगार
• श्रद्धालुओं ने की श्री राम दरबार की मंगला आरती
सोनभद्र । नगर के आरटीएस क्लब मैदान में चल रहे श्री रामचरितमानस नवाह पाठ महायज्ञ के पांचवें दिन प्रभु श्री राम दरबार का भव्य श्रृंगार शिशु त्रिपाठी ने किया। इसके बाद समिति के अध्यक्ष सत्यपाल जैन एवं महामंत्री सुशील पाठक सहित मंच पर भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रभु श्री राम दरबार की मंगला आरती की।
वहीं पांचवें दिन पाठ करते हुए काशी से पधारे आचार्य पं0 सूर्य लाल मिश्र ने कहां कि भगवान राम के वनवास के बाद चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ की मृत्यु के पश्चात ननिहाल से भरत एवं शत्रुघ्न को बुलवाया जाता है। अयोध्या लौट कर दोनों भाई भगवान राम लक्ष्मण सीता के वनवास से अवगत होते हैं और मां कैकेई को अपशब्द कहते हुए बनवास की दोषी मंथरा को दंड देते हैं। इसके पश्चात चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ का अंतिम संस्कार करते हैं। इसके बाद माताओं एवं गुरु वशिष्ठ के परामर्श से भरत एवं शत्रुघ्न गुरु माताओं सहित चित्रकूट पहुंचते हैं, काफी अनुनय विनय के पश्चात जब राम अयोध्या लौटने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो उनकी चरण पादुका लेकर भरत अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं।
वही एक दिन पूर्व आयोजित रात्रि प्रवचन में प्रसिद्ध कथा व्यास नीरज जी भैया ने कहां कि कैकेई द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांग कर भगवान राम को 14 वर्षों का वनवास दिला दिया गया उन्होंने कहा सुना हूं प्राण प्रिय भागव जी का। देहु एक वर भारतहि रोका। मांगहूं इसर कर जोरी। परवहु नाथ मनोरथ मोरी।




