Sonbhadra news : छठ महापर्व के दूसरे दिन मनाया जा रहा 'खरना'
इस दिन से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है, जिसमें व्रती महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करती हैं।

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6:41 PM, October 26, 2025
घनश्याम पांडेय/ विनीत शर्मा (संवाददाता)
चोपन। छठ महापर्व का दूसरा दिन 'खरना' आज देशभर में मनाया जा रहा है। इस दिन से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है, जिसमें व्रती महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करती हैं।खरना के दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर, रोटी और फल का प्रसाद छठी मैया को अर्पित कर उपवास तोड़ा जाता है। यह प्रसाद बाद में ग्रहण किया जाता है।मान्यता है कि खरना के दिन की गई भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव और छठी मैया व्रतियों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह दिन छठ पूजा के कठिन अनुष्ठान की वास्तविक शुरुआत का प्रतीक है।सोनभद्र जिले का चोपन छठ घाट विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। यह जिला बिहार और झारखंड सहित चार राज्यों से घिरा है, जहां से छठ पूजा की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।चोपन रेलवे स्टेशन में कार्यरत लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारी बिहार और झारखंड से हैं। कई सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी भी इस शांत इलाके में बस गए हैं, जो स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर छठ पूजा मनाते हैं।इस वर्ष देर तक मानसून रहने के कारण सोन नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पास के बांध से पानी निकासी बंद करने की अपील के बावजूद नदी में पानी लबालब भरा है। एहतियात के तौर पर नदी क्षेत्र को बैरिकेड कर जाल लगाया गया है, और प्रशासन ने जगह-जगह 'डेंजर' बोर्ड लगाए हैं।किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ टीम को मुस्तैद किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।सूर्यास्त के बाद व्रती महिलाएं उपवास तोड़कर गुड़ की खीर और पूरी का प्रसाद ग्रहण करती हैं। यह प्रसाद बाद में परिवार और समाज के सदस्यों में वितरित किया जाता है, जो इस पर्व की सामुदायिक भावना को दर्शाता है।
खरना का दिन शुद्धता और अनुशासन के पालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूरे घर की साफ-सफाई की जाती है और पूजा स्थल को पूर्णतः पवित्र रखा जाता है। खरना का प्रसाद बिना नमक, मसाले या किसी तैलीय पदार्थ के तैयार किया जाता है। यह सात्विक भोजन शरीर और मन की शुद्धि में सहायक माना जाता है।खरना की पूजा सूर्यास्त के तुरंत बाद संपन्न की जाती है। दिनभर निर्जल उपवास रखने के बाद व्रती संध्याकाल में स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं। इसके उपरांत घर में मिट्टी या पीतल के चूल्हे पर प्रसाद तैयार किया जाता है। इस प्रसाद में गुड़ की खीर, रोटी और केले का भोग प्रमुख होता है। पूजा के बाद व्रती सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हुए यह प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसे 'खरना प्रसाद' कहा जाता है।




