Sonbhadra News :एसडीएम की संयुक्त टीम की जाँच में खुली पेट्रोल पम्पो की पोल : कहीं सीसीटीवी कैमरे बंद, तो कहीं मिला बिना सत्यापित स्टॉक रजिस्टर
एसडीएम की अगुवाई में पेट्रोल पम्पो पर बड़ा एक्शन: कहीं सीसीटीवी कैमरे बंद, तो कहीं स्टॉक रजिस्टर मिला बिना

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9:06 PM, August 12, 2026
एसडीएम की अगुवाई में पेट्रोल पम्पो पर बड़ा एक्शन: कहीं सीसीटीवी कैमरे बंद, तो कहीं स्टॉक रजिस्टर मिला बिना सत्यापित
दुद्धी (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश शासन के कड़े निर्देशों के बाद भी स्थानीय क्षेत्र में संचालित पेट्रोल पंपों पर नियमों की धज्जियां बेखौफ उड़ाई जा रही हैं। बुधवार को दुद्धी के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अशोक गुप्ता की अगुवाई में प्रशासनिक टीम द्वारा क्षेत्र के कई पेट्रोल पंपों पर अचानक की गई औचक जांच में संचालकों की इस लापरवाही की पूरी पोल खुलकर सामने आ गई है। जांच के क्रम में टीम सबसे पहले लउव नदी स्थित पेट्रोल पम्प, रामनगर स्थित पेट्रोल पम्प, जाबर स्थित पेट्रोल पम्प और फिर हीराचक स्थित पेट्रोल पम्प की जाँच की गई। जाँच के दौरान सुरक्षा मानकों से लेकर नागरिक सुविधाओं और श्रम कानून के उल्लंघन के कई गंभीर मामले उजागर हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के पंप संचालकों में हड़कंप मच गया है।
लापरवाही का आलम: 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' का आदेश सिर्फ कागजों पर-
राज्य सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' का बोर्ड लगाना और इस नियम का पालन कराना अनिवार्य किया गया है। लेकिन एसडीएम की इस जांच में पाया गया कि अधिकांश पंपों से यह बोर्ड पूरी तरह गायब था और बिना हेलमेट आने वाले चालकों को धड़ल्ले से ईंधन दिया जा रहा था। अधिकारियों ने शासन के इस महत्वपूर्ण निर्देश की अनदेखी पर संचालकों को आड़े हाथों लिया।
परिसर में अवैध पार्किंग पर भड़के अधिकारी-
जैसे ही प्रशासनिक टीम पेट्रोल पंपों के परिसर में दाखिल हुई, वहां ईंधन भराने वाली कतारों के बजाय अनावश्यक और लावारिस रूप से खड़ी गाड़ियां मिलीं। सुरक्षा के लिहाज से अतिसंवेदनशील माने जाने वाले पेट्रोल पंप परिसरों में इस तरह गाड़ियों का जमावड़ा देखकर एसडीएम अशोक गुप्ता का पारा चढ़ गया। उन्होंने इस अव्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रबंधकों और संचालकों को मौके पर ही जमकर फटकार लगाई और तुरंत गाड़ियां हटाने के निर्देश दिए।
मजदूरी के नाम पर क्रूर मजाक: नोजल गर्ल को 9 घंटे की ड्यूटी पर महज ₹200
इस पूरी छापेमारी में सबसे चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला महिला श्रमिकों के शोषण का सामने आया है। लउवा नदी स्थित पेट्रोल पम्प पर तैनात महिला कर्मचारियों (नोजल गर्ल) से निर्धारित समय से अधिक यानी रोजाना 9-9 घंटे की कड़ी ड्यूटी कराई जा रही है, लेकिन इसके एवज में उन्हें मजदूरी के नाम पर प्रतिदिन महज ₹200 की दिहाड़ी दी जा रही है। श्रम विभाग के न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के नियमों की यह सरेआम धज्जियां उड़ाने वाला मामला है, जिस पर अधिकारियों ने सख्त संज्ञान लिया है।
स्टॉक रजिस्टर सत्यापित नही,सुरक्षा के लिए लगे तीसरी आंख भी 'अंधी'
गड़बड़ियों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। पेट्रोल और डीजल की आवक तथा बिक्री का लेखा-जोखा रखने वाला 'स्टॉक रजिस्टर' भी मौके पर सत्यापित (वेरिफाई) नहीं पाया गया, जो सीधे तौर पर ईंधन के खेल या कालाबाजारी की आशंका को जन्म देता है। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे भी हीराचक पोलवा स्थित पेट्रोल पर पूरी तरह खराब और बंद हालत में पाए गए।वहाँ मौजूद मैनेजर ने बताया कि सीसीटीवी कैमरा 3-4 दिन से खराब हैं जो बनने के लिए गया हैं। ज़ब टीम ने 500-500 लीटर डीजल बिक्री के बारे में पूछा तो संतोषजनक जबाब नही दे पाए।
शौचालय बदहाल, पीने के पानी और हवा की स्थिति दयनीय
पंपों पर आम जनता और उपभोक्ताओं के लिए मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह ध्वस्त मिलीं। नियमानुसार हर पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेयजल, निःशुल्क हवा और साफ-सुथरे शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य है। लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद बदतर पाई गई और हवा-पानी की मशीनें शोपीस बनी हुई थीं।
इस जाँच टीम में बाट -माप अधिकारी अभिषेक रंजन, सेल्स सर्विस ऑफिसर सर्वेश गौतम, सप्लाई इंस्पेक्टर परवेज आलम शामिल रहें।




