Sonbhadra news : अंधविश्वास की भेंट चढ़ा मासूम .......
करैत सर्प के डंसने से 14 वर्षीय मासूम छात्र राहुल की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। घर का इकलौता बेटा खोने से पूरा परिवार गम में डूब गया।

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11:16 PM, August 22, 2025
धर्मेंद्र कुमार (संवाददाता)
★ करैत के डंसने से 14 वर्षीय छात्र की मौत, इलाज के बजाय ओझा के चक्कर में फंसे परिजन
विंढमगंज। जिले के सलैयाडी गांव में गुरुवार की आधी रात दिल दहला देने वाली घटना घट गई। करैत सर्प के डंसने से 14 वर्षीय मासूम छात्र राहुल की आज इलाज के दौरान मौत हो गई। घर का इकलौता बेटा खोने से पूरा परिवार गम में डूब गया। सबसे बड़ा दर्दनाक पहलू यह रहा कि समय पर इलाज कराने की जगह परिजन अंधविश्वास में उलझकर बच्चे की जिंदगी नहीं बचा पाए।
चारपाई पर सोते समय सांप ने तीन बार काटा
गुरुवार की रात करीब 12 बजे राहुल अपनी मां और छोटी बहन के साथ चारपाई पर सो रहा था। तभी करैत सांप उसके शरीर पर चढ़ आया और एक ही जगह पर तीन बार डंस लिया। अचानक चीखने की आवाज सुनकर परिवार के लोग जाग गए। उन्होंने कमरे में अफरा-तफरी के बीच सांप को तो बंद कर दिया, लेकिन बच्चे की जान बचाने के लिए सही कदम नहीं उठा सके।
झाड़-फूंक में गंवाया कीमती वक्त, अस्पताल पहुंचते ही गई जान
राहुल की हालत बिगड़ने लगी तो परिजनों ने उसे नजदीकी अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के ओझा के पास पहुंचा दिया। झाड़-फूंक और टोने-टोटके में करीब दो घंटे बर्बाद हो गए। हालत गंभीर होने पर जब उसे आज भोर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी लाया गया तो डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन करीब 20 मिनट बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
मजदूरी पर गए पिता पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक राहुल के पिता धर्मेंद्र बियार मजदूरी करने के लिए चुनार गए थे। रात में घटना की खबर मिलते ही वे भागकर घर लौटे, लेकिन तब तक बेटे की मौत हो चुकी थी। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
मां और दादी अब भी अंधविश्वास में फंसी
बेटे की मौत के बाद भी राहुल की मां और दादी अंधविश्वास से बाहर निकलने को तैयार नहीं। मां बार-बार कहती रही – “मेरा बच्चा अभी जिंदा है, मुझे आधे घंटे के लिए दे दीजिए, मैं उसे ओझा के पास ले जाऊंगी, वह उसे जिंदा कर देगा।” वहीं दादी का मानना था कि “सांप काटने के बाद 24 घंटे तक दिमाग में जान रहती है, झाड़-फूंक से वह ठीक हो सकता है।”
पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया छात्र का शव
डॉक्टरों ने राहुल को मृत घोषित कर शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। बावजूद इसके परिजन अंधविश्वास के जाल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। गांव में चर्चा है कि अगर शुरुआत में ही बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।




