Sonbhadra News : निजी अस्पताल में इंजेक्शन लगते ही मासूम ने तोड़ा दम, लापरवाही का आरोप लगा परिजनों ने किया हंगामा
22 साल के लंबे इंतजार और मन्नतों के बाद जिस बेटी ने घर में खुशियां बिखेरी थीं, गुरुवार को उसी मासूम शगुन की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के चुर्क वार्ड नंबर....

शगुन की मौत के बाद बिलखते परिजन और मौके पर जुटी भीड़...
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11:53 PM, September 3, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । 22 साल के लंबे इंतजार और मन्नतों के बाद जिस बेटी ने घर में खुशियां बिखेरी थीं, गुरुवार को उसी मासूम शगुन की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के चुर्क वार्ड नंबर एक निवासी दो साल चार माह की शगुन ने नगर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। मामला गरमाया तो अस्पताल का स्टाफ मौके से चला गया। घटना के बाद निजी अस्पतालों की उपचार व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह आक्रोशित परिजनों को शांत कराया। पुलिस ने बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया। मृतका के पिता सुरेंद्र ने कोतवाली में तहरीर देकर मामले में कार्यवाही की मांग की है।
भोर तीन बजे अस्पताल पहुंची थी मासूम, कुछ घंटे बाद ही मौत -
पिता सुरेंद्र के मुताबिक गुरुवार की भोर करीब तीन बजे शगुन की तबीयत खराब हुई तो उसे तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह चिकित्सक की सलाह पर बच्ची के खून की जांच कराई गई। इसके बाद चिकित्सक ने एक इंजेक्शन लिखकर दिया।
परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन अस्पताल की नर्स को दिया गया और नर्स ने बच्ची को इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के बाद ही बच्ची की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। दोपहर करीब एक बजे मासूम ने दम तोड़ दिया।
जिस बच्ची को कुछ घंटे पहले इलाज की उम्मीद में अस्पताल लाया गया था, उसकी मौत की खबर ने परिजनों के पैरों तले जमीन खिसका दी। इसके बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
मौत के बाद स्टाफ गायब, आखिर जिम्मेदारी किसकी -
मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। परिजनों का आरोप है कि बच्ची की मौत के बाद अस्पताल का स्टाफ मौके से चला गया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि उपचार में सब कुछ नियमानुसार था तो मौत के बाद अस्पताल कर्मियों को मौके पर रहकर परिजनों को जवाब देने और घटना की जानकारी देने की जिम्मेदारी किसकी थी?
बच्ची को कौन सा इंजेक्शन लगाया गया? किस चिकित्सक ने लिखा? कितनी मात्रा निर्धारित की गई थी? इंजेक्शन किसने लगाया? इंजेक्शन देने के बाद बच्ची की हालत बिगड़ने पर तत्काल क्या चिकित्सकीय कदम उठाए गए? इन तमाम सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
22 साल पैदा हुई थी शगुन, छठ की तैयारी से पहले घर में छाया मातम -
मृतका के पिता सुरेंद्र ने बताया कि शादी के 22 वर्ष बाद काफी मन्नतों के बाद शगुन का जन्म हुआ था। बेटी के आने के बाद परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं था। इस वर्ष परिवार शगुन के लिए धूमधाम से छठ व्रत करने की तैयारी में था लेकिन जिस घर में खुशियों की तैयारी होनी थी, वहां अब मातम पसरा है। जिस बेटी के भविष्य के सपने परिवार ने संजोए थे, वह सपने अस्पताल की चारदीवारी के भीतर दम तोड़ गए।
‘अब कौन कहेगा पापा आ गए...’ पिता की चीखों से दहला अस्पताल -
बेटी की मौत के बाद पिता सुरेंद्र खुद को संभाल नहीं सके। अस्पताल परिसर में वह बेटी को याद कर दहाड़ें मारकर रोते रहे। उनकी जुबां पर बार-बार बेटी के वहीं शब्द थे "अब कौन कहेगा पापा आ गए... पापा, मैं भी पढ़ने जाऊंगी।"
बेटी के इन मासूम शब्दों को याद कर पिता का विलाप अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को भी झकझोर गया। 22 साल के इंतजार के बाद मिली बेटी को खोने का दर्द परिवार के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
तहरीर के बाद भी मुकदमा नहीं, पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार -
पिता ने पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि तहरीर देने के बावजूद अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। वहीं कोतवाली प्रभारी निरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
सीएमओ ने बैठाई तीन सदस्यीय जांच, रिपोर्ट पर होगी कार्यवाही -
मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। सीएमओ ने बताया कि जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
जांच की आड़ में दब न जाए मासूम की मौत का सवाल -
बहरहाल, मासूम शगुन की मौत ने निजी अस्पतालों की उपचार व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन लगने के बाद बच्ची की हालत बिगड़ी और कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई, जबकि मौत के बाद अस्पताल स्टाफ के मौके से चले जाने का आरोप भी लगाया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी उठता है कि यदि उपचार के दौरान सब कुछ निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप हुआ था तो बच्ची की हालत बिगड़ने के बाद उसे बचाने के लिए क्या-क्या चिकित्सकीय कदम उठाए गए और मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही आखिर कौन तय करेगा?
हालांकि सीएमओ ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है, लेकिन अब निगाहें सिर्फ जांच टीम पर नहीं, बल्कि उसकी कार्यवाही पर हैं। जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति हुई तो यह शगुन के परिवार के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा होगा। जांच में यह साफ होना चाहिए कि बच्ची को कौन सा इंजेक्शन दिया गया, किसने लगाया, किस चिकित्सकीय सलाह पर लगाया गया, उसके बाद उसकी बिगड़ती हालत पर क्या उपचार किया गया और क्या निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन हुआ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ ऐसी कार्यवाही होनी चाहिए जो निजी अस्पतालों को मरीज की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर कर दे। क्योंकि सवाल केवल शगुन का नहीं है बल्कि सवाल उन तमाम मरीजों और उनके परिवारों का है, जो इलाज की उम्मीद लेकर निजी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाते हैं।




