Sonbhadra News : 'सोनभद्र का इतिहास' का लोकार्पण समारोह सम्पन्न
बसन्त पंचमी के पावन अवसर पर श्रीरघुनाथ-मन्दिर देवगढ़ तीर्थक्षेत्र न्यास के तत्वावधान में प्रख्यात इतिहासकार डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' कृत 'सोनभद्र का इतिहास' को लोकार्पण सोल्लास सम्पन्न हुआ।

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5:55 PM, January 23, 2026
सोनभद्र । बसन्त पंचमी के पावन अवसर पर श्रीरघुनाथ-मन्दिर देवगढ़ तीर्थक्षेत्र न्यास के तत्वावधान में प्रख्यात इतिहासकार डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' कृत 'सोनभद्र का इतिहास' को लोकार्पण सोल्लास सम्पन्न हुआ।
रॉबर्ट्सगंज के होटल डीआर ड्रीम्स लग्जरी बैंक्वेट में आयोजित इस भव्य समारोह के सभाध्यक्ष पूर्वकुलपति पद्मश्री अभिराजराजेन्द्र मिश्र, मुख्य अतिथि ओडिशा के पूर्व डीडीपी महामहोपाध्याय अरुणकुमार उपाध्याय, अतिविशिष्ट अतिथि पूर्व आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र, विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व डीजीपी डॉ. धर्मवीर सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष रूबीप्रसाद, राजा चन्द्रविक्रमपद्मशरण शाह, युवराज देवांशब्रह्म की उपस्थिति रही।
सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपप्रज्ज्वलन से प्रारम्भ हुए इस समारोह सर्वप्रथम ग्रन्थकार डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' ने सोनभद्र के गौरवपूर्ण इतिहास को विस्तारपूर्वक रेखांकित करते हुए इतिहास के औचित्य पर प्रकाश डाला। उत्तरप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. सरजीत सिंह डंग ने सोनभद्र को प्राचीनता और आधुनिकता का संगम बताते हुए 'सोनभद्र का इतिहास' के वैशिष्ट्य को रेखांकित किया। 'सोनभद्र का इतिहास' के सम्पादक एवं सोनभद्र के जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने सोनभद्र को मानवता के इतिहास का साक्षी बताते हुए सलखन के जीवाश्म, अगोरी, विजयगढ़, शिवद्वार, गोठानी, नलराजा आदि के प्रामणिक इतिहास को रेखांकित किया। जिलाधिकारी ने कहा कि डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' ने 'सोनभद्र का इतिहास' लिखकर एक बहुत बड़े अभाव की पूर्ति की है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने ग्रन्थकार डॉ. जितेन्द्र के सारस्वत श्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की।
पूर्व डीजीपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने 'सोनभद्र का इतिहास' के लेखन के लिए डॉ. संजय को हार्दिक बधाई दी।
पूर्व आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र ने मिर्ज़ापुर और सोनभद्र के अन्योन्याश्रित सम्बन्ध के रेखांकित करते हुए इस धरती के ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की त्रिवेणी कहा। विजयगढ़ के पूर्व राजा चन्द्रविक्रमपद्मशरण शाह ने इस ग्रन्थ के प्रकाशन और लेखन के औचित्य पर प्रकाश डाला।
रूबीप्रसाद ने सोनभद्र के आधुनिक सन्दर्भों को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि महामहोपाध्याय अरुणकुमार उपाध्याय ने ग्रन्थकार संजय की भारतीय दृष्टि को रेखांकित करते इस ग्रन्थ को न केवल सोनभद्र के सन्दर्भ में, अपितु सम्पूर्ण भारतीय सन्दर्भ में भी आवश्यक बताया।
सभाध्यक्ष पद्मश्री प्रो. अभिराजराजेन्द्र मिश्र ने महीयसी प्रभा सिंह का स्मरण करते हुए डॉ. जितेन्द्र के विशाल वाङ्मय की प्ररोचना करते हुए कहा कि निष्पक्ष न्यायाधीश की तरह रागद्वेष से मुक्त होकर डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह 'संजय' ने सोनभद्र का इतिहास लिखा है। इस ग्रन्थ की जितनी प्रशंसा की जाय, कम है।
कन्तित राज विजयपुर परिवार के सदस्य बाबू गोविन्दप्रसाद सिंह, बाबू देवराज सिंह, बाबू राजेश सिंह, बाबू देवेशप्रताप सिंह, बाबू योगेशबहादुर, बाबू जैनेन्द्र सिंह, बाबू सुधीर सिंह ने समन्वित रूप से डॉ. जितेन्द्र को सम्मानित किया।
इस अवसर पर अगोरी, बड़हर, विजयगढ़, सिंगरौली, कन्तित, विजयपुर एवं माण्डा रियासत के पारिवारिक सदस्यों के अतिरिक्त हजारों की संख्या में सुधी श्रोता उपस्थित थे। समारोह का काव्यात्मक संचालन कविवर राजेन्द्र त्रिपाठी ने किया। समारोह को सफल बनाने में प्रभात सिंह चन्देल, ज्ञानेन्द्र सिंह 'बृजेश', धर्मेन्द्र सिंह 'राजेश', रमेश सिंह पकरी, राहुल श्रीवास्तव, विजयशंकर चतुर्वेदी, प्रद्युम्न त्रिपाठी 'पद्म', पद्मिनी श्वेता सिंह, रामनाथ शिवेन्द्र, अशोक ललित महेन्द्रू, हरिदर्शन सांख्य आदि की भूमिका सराहनीय रही।




