Sonbhadra news : “बीमारी ने तोड़ा, अपनों ने छोड़ा, बसों ने भटकाया; अर्धमूर्छित अनाथ बालिका को PRD जवान ने दिया सहारा”
मधुपुर कस्बे के उत्तरी तिराहे के समीप शुक्रवार को उस समय मानवता की मिसाल देखने को मिली, जब एक प्राइवेट सवारी बस चालक अर्धमूर्छित हालत में एक बालिका को सड़क किनारे उतारकर चला गया।

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3:56 PM, September 18, 2026
जयनाथ मौर्या (संवाददाता)
मधुपुर, सोनभद्र। मधुपुर कस्बे के उत्तरी तिराहे के समीप शुक्रवार को उस समय मानवता की मिसाल देखने को मिली, जब एक प्राइवेट सवारी बस चालक अर्धमूर्छित हालत में एक बालिका को सड़क किनारे उतारकर चला गया। बालिका को अचेत अवस्था में देखकर तिराहे पर ड्यूटी कर रहे पीआरडी जवान ने तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया।
होश में आने के बाद बालिका ने अपनी दर्दभरी कहानी बताई। उसने बताया कि वह खुद को अनाथ बताती है। उसके माता-पिता का निधन उस समय हो गया था, जब वह काफी छोटी थी। इसके बाद एक भाई की भी मृत्यु हो गई, जिससे वह पूरी तरह अकेली हो गई। जीवनयापन के लिए वह मीरजापुर के एक होटल में काम कर रही थी। तबीयत खराब होने पर होटल संचालक ने भी उसे अपने यहां रखने से मना कर दिया।
बालिका के मुताबिक, कुछ लोगों ने उसे बस में बैठा दिया, जिससे वह शाहगंज पहुंची। वहां कुछ लोगों ने महिला थाना जाने की बात कहकर उसे दूसरी बस में बैठा दिया। लगातार खराब स्वास्थ्य के बीच सफर करती हुई वह मधुपुर तक पहुंच गई, जहां उसकी हालत अर्धमूर्छित हो गई।
मामले की सूचना सुकृत पुलिस को दी गई। पुलिस की ओर से चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई। इसके बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. अखिलेश ने क्षेत्राधिकारी रणधीर मिश्रा से संपर्क कर बालिका की स्थिति और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
सीओ के स्तर से बालिका के संरक्षण की पहल की गई। इसके बाद बालिका गृह से अनुपमा जायसवाल मधुपुर पहुंचीं और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बालिका को अपने साथ ले गईं।
अनाथ और असहाय बालिका के लिए पीआरडी जवान से लेकर स्वास्थ्य विभाग और बालिका गृह तक की मदद ने उसे सुरक्षित संरक्षण दिलाया। घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर बीमारी और बेसहारा हालत में भटक रही बालिका को जिम्मेदारीपूर्वक संरक्षण मिलने से पहले कई जगहों पर बसों के सहारे क्यों भटकना पड़ा।




