Sonbhadra News : जनपद में भूमि विवादों के चिन्हित मामलों की होगी पुनः जांच, शासन ने शुरू किया विशेष अभियान
भूमि विवादों के प्रभावी, पारदर्शी एवं स्थायी निस्तारण को लेकर शासन ने पूरे प्रदेश में एक माह का विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत 1 जून से 30 जून 2026 तक पूर्व में निस्तारित किए गए भूमि विवादों.....

जिले के एसडीएम व तहसीलदारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भूमि विवादों का सत्यापन करते डीएम चर्चित गोंड...
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4:21 PM, June 1, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• 1 जून से 30 जून तक चलेगा अभियान, कागजी निस्तारण की खुलेगी पोल, भू-माफियाओं पर होगी सख्त कार्रवाई
सोनभद्र । भूमि विवादों के प्रभावी, पारदर्शी एवं स्थायी निस्तारण को लेकर शासन ने पूरे प्रदेश में एक माह का विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत 1 जून से 30 जून 2026 तक पूर्व में निस्तारित किए गए भूमि विवादों की पुनः जांच कर उनकी वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। अभियान को लेकर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी चर्चित गोंड ने बताया कि "शासन स्तर पर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण के बाद यह निर्णय लिया गया है। अभियान के दौरान भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा, सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, चकबंदी संबंधी विवाद, राजस्व एवं पुलिस विभाग से जुड़े भूमि प्रकरणों सहित सभी महत्वपूर्ण भूमि विवादों की गहन समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन के संज्ञान में यह बात आई है कि अनेक मामलों में शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी स्तर पर दिखा दिया गया अथवा उन्हें "स्पेशल क्लोज" श्रेणी में डालकर बंद कर दिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर विवाद यथावत बने रहे। कुछ मामलों में अधूरी एवं भ्रामक रिपोर्ट लगाकर निस्तारण दर्शाया गया। ऐसे सभी मामलों की अब तहसील, जिला एवं मंडल स्तर पर पुनः जांच होगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण का भौतिक सत्यापन कर निष्पक्ष एवं तथ्यपरक रिपोर्ट तैयार की जाए। समीक्षा के दौरान मामलों को चार श्रेणियों वास्तविक रूप से निस्तारित, निस्तारित लेकिन सत्यापन योग्य, अनिस्तारित तथा भूमि विवाद की श्रेणी से बाहर के मामलों में वर्गीकृत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शासन द्वारा विभिन्न प्रकार के भूमि विवादों के निस्तारण हेतु विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित की गई है। ग्राम स्तर के विवादों से लेकर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, राजस्व न्यायालय, सिविल न्यायालय, चकबंदी न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की अलग-अलग समीक्षा होगी। न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के लिए वाद संख्या, सीएनआर संख्या सहित सभी आवश्यक विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा तथा अंतिम न्यायिक आदेश के बाद ही शिकायत का पूर्ण निस्तारण माना जाएगा।
जिलाधिकारी ने भू-माफियाओं एवं कमजोर वर्गों की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक तहसील में न्याय पंचायतवार ग्राम चौपाल आयोजित कर मौके पर ही भूमि विवादों का गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी समाधान कराने पर जोर दिया, जिससे लोगों को तहसील और न्यायालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि अभियान की नियमित समीक्षा मंडलायुक्त स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही, गलत निस्तारण अथवा भ्रामक रिपोर्ट पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी, जबकि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि शासन की यह पहल केवल शिकायतों की संख्या कम करने के लिए नहीं, बल्कि भूमि विवादों का वास्तविक, निष्पक्ष एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सभी अधिकारी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें, ताकि आमजन को त्वरित न्याय मिल सके और भूमि विवादों का प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित हो सके।




