Sonbhadra News : इंसाफ की गुहार लेकर पैरों में गिरा बेबस पिता, विधायक-डीएम के सामने छलका दर्द, डीएम ने दिया कड़ी कार्यवाही का भरोसा
जिस घर में ढाई साल की मासूम शगुन के लिए इस वर्ष छठ व्रत की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा है। जिस बेटी के आने से 22 साल बाद एक पिता की दुनिया खुशियों से भर गई थी, आज वहीं पिता अपनी मासूम.......

कलेक्ट्रेट में डीएम और विधायक से न्याय की गुहार लगाता पीड़ित परिवार.....
sonbhadra
2:00 PM, September 5, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• सीएमओ ने जॉच के लिए गठित की तीन सदस्यी टीम
सोनभद्र । जिस घर में ढाई साल की मासूम शगुन के लिए इस वर्ष छठ व्रत की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा है। जिस बेटी के आने से 22 साल बाद एक पिता की दुनिया खुशियों से भर गई थी, आज वहीं पिता अपनी मासूम बेटी की मौत का इंसाफ मांगने के लिए अधिकारियों के पैरों में गिरने को मजबूर है। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के बाद शगुन की मौत के मामले में दो दिन बाद भी कार्रवाई न होने से आक्रोशित परिजनों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जमकर विरोध जताया और शिक्षक सम्मान कार्यक्रम में पहुंचे सदर विधायक भूपेश चौबे व जिलाधिकारी चर्चित गोंड का घेराव कर दिया।
इस दौरान शगुन के पिता सुरेंद्र अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने की गुहार लगाते हुए विधायक और जिलाधिकारी के पैरों में गिर पड़े। पिता का दर्द देखकर कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल गमगीन हो गया। परिजनों ने दो टूक कहा कि जब तक दोषी डॉक्टर और नर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती, वे कलेक्ट्रेट से नहीं हटेंगे।
भोर में तबीयत बिगड़ी, इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे अस्पताल -
मृतका के मामा संतोष कुमार के मुताबिक गुरुवार की भोर करीब तीन बजे अचानक शगुन की तबीयत खराब हुई। घबराए परिजन उसे तत्काल नगर के धर्मशाला चौक के पास संचालित नेशनल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे और भर्ती कराया। सुबह चिकित्सक की सलाह पर बच्ची के खून की जांच कराई गई। इसके बाद चिकित्सक ने एक इंजेक्शन लिखकर दिया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक द्वारा लिखा गया इंजेक्शन अस्पताल की नर्स को दिया गया और नर्स ने बच्ची को इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के बाद ही शगुन की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों के मुताबिक दोपहर करीब एक बजे मासूम ने दम तोड़ दिया।
जिस बच्ची को कुछ घंटे पहले परिजन इलाज और जिंदगी की उम्मीद लेकर अस्पताल लाए थे, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
22 साल बाद आई थी खुशियां, अब घर में पसरा मातम -
वहीं मृतका शगुन के पिता सुरेंद्र ने भर्राए गले से बताया कि शादी के 22 वर्ष बाद काफी मन्नतों के बाद शगुन का जन्म हुआ था। बेटी के घर आने के बाद परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं था। शगुन के हर कदम के साथ परिवार उसके भविष्य के सपने बुन रहा था।
सुरेंद्र के मुताबिक इस वर्ष परिवार शगुन के लिए धूमधाम से छठ व्रत करने की तैयारी कर रहा था। लेकिन किसे पता था कि खुशियों की तैयारी कर रहे परिवार पर अचानक ऐसा कहर टूट पड़ेगा कि उसी घर में मातम पसर जाएगा।
उन्होंने कहा कि "जिस बेटी के लिए परिवार ने बड़े-बड़े सपने संजोए थे, वह बेटी अस्पताल की चारदीवारी के भीतर हमसे हमेशा के लिए छिन गई।"
पिता के इस दर्द ने पूरे मामले को और भी मार्मिक बना दिया है। परिवार का आरोप है कि यदि इलाज में लापरवाही नहीं हुई तो इंजेक्शन लगने के बाद अचानक बच्ची की हालत क्यों बिगड़ी और उसकी मौत कैसे हुई, इसका जवाब उन्हें मिलना चाहिए।
दो दिन बाद भी कार्यवाही नहीं, तो फूटा परिजनों का गुस्सा -
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित परिजनों को समझाया-बुझाया और मृतका का पोस्टमार्टम कराया। लेकिन घटना के दो दिन बाद भी अस्पताल अथवा कथित रूप से जिम्मेदार चिकित्सकीय कर्मियों के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आने से परिजनों का आक्रोश बढ़ता गया।
परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि एक मासूम की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के बजाय जांच के नाम पर मामले को टाला जा रहा है।
निजी अस्पतालों की निगरानी पर फिर उठे सवाल -
शगुन की मौत ने जिले में संचालित निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि किसी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मासूम की मौत हो जाती है तो जिम्मेदारी तय करने में इतनी देर क्यों होती है? क्या कार्रवाई के लिए पीड़ित परिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों का घेराव करना पड़ेगा?
निजी अस्पतालों की जवाबदेही और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। शगुन के परिवार को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का इंतजार है।
डीएम ने एडीएम और सीएमओ को दिए जांच के निर्देश -
परिजनों के विरोध और भावुक माहौल को देखते हुए जिलाधिकारी चर्चित गोंड ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने एडीएम और सीएमओ को तत्काल मौके पर जाकर मामले की जांच करने तथा उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्यवाही के संबंध में मीडिया को भी अवगत कराया जाएगा।
क्या बोले जिम्मेदार -
सीएमओ ने बताया कि "हॉस्पिटल की जांच के लिए तीन सदस्यी टीम गठित की गई है और आज वह स्वयं और एडीएम भी मौके पर जाकर जाँच करेंगे। हॉस्पिटल प्रशासन की किसी भी स्तर की लापरवाही मिलने पर हॉस्पिटल के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।"




