Sonbhadra News : समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के दावों की निकली हवा, सीडीओ ने दुद्धी CHO और DPM के वेतन भुगतान पर लगाई रोक
जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में ही खुलती नजर आई। अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच जब व्यवस्थाओं की समीक्षा हुई....

जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक करते सीडीओ जागृति अवस्थी, सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा व अन्य....
sonbhadra
5:52 PM, September 2, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में ही खुलती नजर आई। अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच जब व्यवस्थाओं की समीक्षा हुई तो डिलीवरी, आयुष्मान कार्ड, एनआरसी सेंटर, साफ-सफाई और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण जैसे बुनियादी मोर्चों पर ही विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। हालात से नाराज मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए साफ कर दिया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही अब नहीं चलेगी।
सीडीओ जागृति अवस्थी ने जिले के सभी चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देशित करते हुए कहा कि "शासन की मंशा के अनुरूप जनपदवासियों को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना होगा। सवाल यह है कि जब सरकारी अस्पतालों में बुनियादी व्यवस्थाओं की ही लगातार समीक्षा और निगरानी की जरूरत पड़ रही है, तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आखिर किस भरोसे मिलेंगी।"
सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी तक नहीं करा पा रहीं आशाएं -
स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी तस्वीर उस समय और गंभीर हो गई जब समीक्षा में सामने आया कि कुछ आशाओं द्वारा सरकारी अस्पतालों में एक भी डिलीवरी नहीं कराई गई। सीडीओ ने ऐसे मामलों में संबंधित आशाओं को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाने और संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए तैनात स्वास्थ्य तंत्र आखिर जमीन पर कितना सक्रिय है। यदि आशाओं के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में प्रसव तक नहीं पहुंच रहे हैं तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मॉनिटरिंग पर सवाल उठना लाजिमी है।
अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अगले माह एमवाईसी के विरुद्ध होगी एडवर्स एंट्री की कार्यवाही -
आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रगति ने भी स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की तस्वीर साफ कर दी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी की प्रगति धीमी पाए जाने पर सीडीओ ने संबंधित सीएचओ और डीपीएम के वेतन भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश दिए साथ ही अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अगले माह एमवाईसी के विरुद्ध एडवर्स एंट्री की कार्यवाही की चेतावनी दी है। यानी जिस योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को इलाज की आर्थिक सुरक्षा देना है, उसकी प्रगति में सुस्ती को लेकर अब सीधे जवाबदेही तय की जाएगी।
कुपोषित बच्चों के मामले में भी सख्ती -
एनआरसी सेंटरों में सैम-मैम बच्चों की भर्ती को लेकर भी सीडीओ ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आईसीडीएस विभाग को निर्देशित किया। उन्होंने सुनिश्चित करने को कहा कि अति दुर्बल बच्चों को समय से एनआरसी सेंटर में भर्ती कराकर उनका उपचार कराया जाए।
कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण है, ऐसे में उनकी पहचान और भर्ती की प्रक्रिया में किसी भी स्तर की लापरवाही भारी पड़ सकती है। सीडीओ ने विभागीय अधिकारियों को इस मोर्चे पर विशेष गंभीरता बरतने के निर्देश दिए।
अस्पतालों की सफाई भी विभाग के लिए बनी चुनौती -
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी बैठक में सख्त तेवर दिखे। सीडीओ ने कहा कि सफाई के लिए नियुक्त कर्मियों की लापरवाही सामने आने पर संबंधित चयनित एजेंसी को सूचित कर उन्हें तत्काल हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को इलाज के साथ स्वच्छ वातावरण मिलना बुनियादी जरूरत है। ऐसे में सफाई व्यवस्था पर सवाल उठना स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
फाइलों से निकलकर गांवों तक पहुंचे आरबीएसके की टीमें -
डीपीओ आईसीडीएस को निर्देश दिया कि आरबीएसके टीमें नियमित रूप से आशा और आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करें। इससे साफ है कि अब सिर्फ कागजी रिपोर्ट और बैठकों में आंकड़े प्रस्तुत करने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक पहुंच और जमीनी क्रियान्वयन पर नजर रखने की कोशिश की जा रही है।
ये अधिकारी रहे मौजूद -
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण, जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
"बहरहाल जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिस तरह स्वास्थ्य सेवाओं की कमियां एक-एक कर सामने आईं, उससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। कुपोषित बच्चों की भर्ती से लेकर सरकारी अस्पतालों में प्रसव, आयुष्मान कार्ड की सुस्त रफ्तार और साफ-सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में सुधार के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश और कार्यवाही की चेतावनी देनी पड़ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था इतनी सक्रिय है तो ये खामियाँ बार-बार सामने क्यों आ रही हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ बैठकों में निर्देशों और आंकड़ों तक ही सीमित हैं या फिर उनका असर अस्पतालों और गांवों की जमीनी व्यवस्था में भी दिखाई देगा? फिलहाल सीडीओ की सख्ती और फटकार का जिम्मेदारों पर कितना प्रभाव पड़ता है यह तो वक्त ही बताएगा। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन निर्देशों को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की है। वरना सरकारी योजनाओं के आंकड़े कागजों पर चाहे जितने चमकते रहें, अस्पतालों की हकीकत मरीजों को हर दिन आईना दिखाती रहेगी।"




