Sonbhadra News : कई मौतों के बाद टूटी स्वास्थ्य विभाग की नींद, छापेमारी में 14 अस्पतालों से गायब मिले डॉक्टर
जिले के निजी अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों, इलाज में लापरवाही और मनमानी वसूली के आरोपों के बीच आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी नींद टूट गई। लंबे समय तक शिकायतों और मौतों पर मौन साधे बैठे.....

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sonbhadra
11:21 PM, June 22, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले के निजी अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों, इलाज में लापरवाही और मनमानी वसूली के आरोपों के बीच आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी नींद टूट गई। लंबे समय तक शिकायतों और मौतों पर मौन साधे बैठे विभाग ने जब छापेमारी की तो निजी अस्पतालों की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ गई। कई अस्पताल ऐसे मिले जहां मरीजों का इलाज तो किया जा रहा था, लेकिन निरीक्षण के समय फूल टाइम चिकित्सक तक मौजूद नहीं थे।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर निजी चिकित्सालय पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ0 गुलाब शंकर यादव ने 18 जून को रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र के 21 निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी एवं अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान 14 अस्पतालों में फुल टाइम चिकित्सकों की अनुपस्थिति ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए।
इन अस्पतालों में नहीं मिले डॉक्टर -
निरीक्षण के दौरान न्यू ओम हॉस्पिटल, यथार्थ हॉस्पिटल, सिटी हॉस्पिटल, न्यू एसएनजी हॉस्पिटल, एसजी हॉस्पिटल, एपीओ हॉस्पिटल, त्रिशा हॉस्पिटल, गुड हेल्थ हॉस्पिटल, लाइफ लाइन हॉस्पिटल, जनता हॉस्पिटल, हंस हॉस्पिटल, सौम्या हॉस्पिटल, प्रभव मेडिकेयर हॉस्पिटल और न्यू उपकार हॉस्पिटल (केकराही) में फुल टाइम चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पतालों में डॉक्टर ही मौजूद नहीं थे तो मरीजों का इलाज आखिर किसके भरोसे चल रहा था? क्या अस्पताल केवल पंजीकरण और बोर्ड के सहारे संचालित हो रहे हैं? क्या मरीजों की जान भगवान भरोसे छोड़ दी गई है?
मौतों के बाद शुरू हुई कार्रवाई -
जिले में बीते दिनों कई निजी अस्पतालों को लेकर गंभीर शिकायतें और मरीजों की मौत के मामले सामने आए थे। परिजनों ने इलाज में लापरवाही, रेफर में देरी और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। इन घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में थी। अब हुई छापेमारी ने यह साबित कर दिया है कि निजी अस्पतालों में नियमों का पालन कितनी गंभीरता से हो रहा है।
नोडल अधिकारी ने दी सख्त चेतावनी -
निजी चिकित्सालय पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ0 गुलाब शंकर यादव ने कहा कि "निरीक्षण के दौरान जिन चिकित्सालयों में चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए हैं, उन्हें फुल टाइम एमबीबीएस चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्थान में तीन बार निरीक्षण के दौरान चिकित्सक अनुपस्थित मिलते हैं तो उसका ऑनलाइन पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। यदि विभाग द्वारा सील किए गए अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी अथवा अल्ट्रासाउंड सेंटर दोबारा संचालित पाए गए तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।"




