स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि जिले में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) के 9 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 3 अधिकारी ही तैनात हैं। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से भी दो अधिकारी आगामी मार्च माह तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यदि समय रहते रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं हुईं तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक संकट में फंस सकती है।वहीं डिप्टी सीएमओ के 7 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 5 अधिकारी ही कार्यरत हैं। नतीजा यह है कि एक-एक अधिकारी के कंधों पर कई-कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं का अतिरिक्त बोझ है। टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, परिवार कल्याण, संचारी रोग नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, अस्पतालों की निगरानी तथा अन्य कार्यक्रमों का प्रभार सीमित अधिकारियों के भरोसे चल रहा है।