Sonbhadra News : सात साल में एक भी मुखबिर नहीं बना सका स्वास्थ्य विभाग, योजना धरासाई
जिले के घोरावल क्षेत्र में भ्रूण हत्या के मामले में एक डॉक्टर व एक नर्स की गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए राज्य....

sonbhadra
11:47 PM, November 15, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• जिम्मेदारों की उदासीनता से जिले में दम तोड़ रही प्रदेश सरकार की 'मुखबिर योजना'
• कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने उठाया था कदम
सोनभद्र । जिले के घोरावल क्षेत्र में भ्रूण हत्या के मामले में एक डॉक्टर व एक नर्स की गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए राज्य सरकार की तरफ से 'मुखबिर योजना' की शुरुआत की गई थी, लेकिन वॉलंटियर्स की कमी कहें या अधिकारियों की उदासीनता यह बहुप्रतिक्षित योजना जनपद सोनभद्र में दम तोड़ती दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि वालंटियर्स यानी मुखबिरों की तलाश की जा रही है, लेकिन सही बात यह है कि अभी तक विभाग के हाथ खाली ही हैं। योजना के सात साल बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग को जांच से जुड़ा दागी सेंटर पकड़वाने को एक भी मुखबिर नहीं मिल सका। मुखबिर योजना के तहत भ्रूण लिंग की पहचान बताने वाले नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों की धरपकड़ करवाने वाले को विभाग की तरफ से दो लाख रुपया तक पुरस्कार देने का प्रावधान था। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए राज्य सरकार की तरफ से 24 जुलाई 2017 को ‘मुखबिर योजना’ की शुरुआत की गई थी।
मुखबिर बनने के लिए अब तक मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में नहीं हुआ एक भी पंजीकरण -
सात साल बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी ऐसा वालंटियर नहीं मिल सका जो भ्रूण लिंग जांच करने वाले नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पता बताकर का उनकी धरपकड़ करवा सके। इस योजना का उद्देश्य था कि गोपनीय सूचना की मदद से शहर के जिन निजी चिकित्सालयों और नर्सिंग होम में भ्रूण परीक्षण होता मिले, उनकी पहचान कर कार्यवाही के घेरे में लाया जा सके। योजना लागू होने के सात साल बाद भी विभाग का मुखबिर बनने के लिए अभी तक मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में किसी ने पंजीकरण नहीं कराया है।




