Sonbhadra News : भगवती सीता की खोज में हनुमान जी पहुंचे लंका
नगर के आटीएस क्लब मैदान में चल रहे श्री राम चरित मानस नवाह्ण पाठ महायज्ञ के सातवें दिन श्री राम दरबार का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात मंचासीन आचार्यों एवं भक्तों गणों ने दिव्य आरती उतारी.....

श्री राम चरित मानस नवाह्ण पाठ महायज्ञ में सजा श्रीराम दरबार
sonbhadra
10:04 PM, December 30, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• महिलाओं ने किया सुन्दर काण्ड का पाठ, मानस पंडाल में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब
सोनभद्र । नगर के आटीएस क्लब मैदान में चल रहे श्री राम चरित मानस नवाह्ण पाठ महायज्ञ के सातवें दिन श्री राम दरबार का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात मंचासीन आचार्यों एवं भक्तों गणों ने दिव्य आरती उतारी तत्पश्चात मुख्य यजमान सत्यपाल जैन ने अपनी पत्नी रजनी जैन के साथ रुद्राभिषेक किया।
बतादें कि सातवें दिन की कथा सुंदरकांड पर आधारित थी जिसमें हनुमानजी का लंका को प्रस्थान, सुरसा मान के बल बुद्धि की परीक्षा, छाया पकड़ने वाली राक्षसी का वर्णन, लंकिनी पर प्रहार, लंका में प्रवेश, हनुमान-विभीषण संवाद, हनुमान जी का अशोक वाटिका में सीता को देखकर दुखी होना और रावण का सीता को भय दिखाना, सीता-हनुमान संवाद, हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार का वध और मेघनाथ द्वारा हनुमान जी को नागपाश में बांध कर सभा में ले जाना, हनुमान रावण संवाद, लंका दहन आदि प्रसंगों का पाठ किया गया। इस दौरान सुंदरकांड महिला मंडल की सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से सुंदरकांड का पाठ किया गया।
दोहे पर प्रकाश डालते हुए मुख्य व्यास आचार्य पं0 सूर्य लाल मिश्र ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस में सुंदरकांड एक महत्वपूर्ण कांड है। हनुमान रावण संवाद, लंका दहन आदि महत्वपूर्ण दोहो पर प्रकाश डालते हुए कहा की- गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस में सुंदरकांड एक महत्वपूर्ण कांड हैं जहां पर सभी राम भक्तों की आस्था और विश्वास की झलक उनके कृत्यो से मिलती है, जिसमें राम भक्त हनुमान का प्रमुख स्थान है।
जामवंत के कहने पर हनुमानजी को उन्हें अपना बल याद आया और वे हृदय में श्री रघुनाथ जी को धारण कर हर्षित होकर लंका की ओर प्रस्थान किए। श्री हनुमान जी की बुद्धि बल की परीक्षा लेने के लिए देवताओं ने सुरसा नामकओल्गा सर्पों की माता को भेजा सुरसा की परीक्षा में सफल रहे और उसने आशीर्वाद देते हुए कहा कि राम काजु सबु करहु तुम्ह बल बुद्धि निधान। आशीष देई गई सो हरसी चले वह हनुमान।।




