Sonbhadra News : गुरु ज्ञान की पूर्णता का ही दूसरा नाम है - डॉ0 मानिक चंद पाण्डेय
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में एनटीपीसी कॉलोनी परिसर, शक्तिनगर में बुधवार की शाम एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता........

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6:23 PM, July 30, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• गुरु पूर्णिमा पर सोन संगम की विचारगोष्ठी, गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान की महत्ता पर मंथन
शक्तिनगर । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में एनटीपीसी कॉलोनी परिसर, शक्तिनगर में बुधवार की शाम एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक मृत्युंजय सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राजनाथ दुबे, वरिष्ठ प्रबंधक, एनसीएल दुधीचुआ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु-शिष्य संबंधों पर आधारित ओशो के प्रवचनांशों के श्रवण एवं ध्यान के साथ हुआ।
कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए सोन संगम के सचिव डॉ. मानिक चंद पाण्डेय ने कहा कि "गुरु ज्ञान की पूर्णता का ही दूसरा नाम है, इसलिए गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है।" उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु केवल शिक्षा देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।
मुख्य अतिथि राजनाथ दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु सभी शिष्यों के लिए समान रूप से उपलब्ध होते हैं, लेकिन प्रत्येक शिष्य अपनी पात्रता, जिज्ञासा और समर्पण के अनुरूप ही गुरु से ज्ञान प्राप्त कर पाता है। उन्होंने गुरु-शिष्य संबंधों को आत्मिक विकास का आधार बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मृत्युंजय सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में गुरु और शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। सूचना क्रांति और डिजिटल युग में केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को यह सिखाना अधिक आवश्यक है कि ज्ञान का अर्जन कैसे किया जाए और उसका सही उपयोग कैसे हो।
वरिष्ठ प्राध्यापक चन्द्रशेखर जोशी ने कहा कि सूचना और ज्ञान में मूलभूत अंतर है। इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जानकारी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन वास्तविक ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों का बोध केवल गुरु ही करा सकता है।
डॉ. योगेन्द्र मिश्र ने कहा कि गुरु शिष्य को बुद्धि से मेधा, मेधा से प्रज्ञा और प्रज्ञा से चेतना की यात्रा पर ले जाता है। यही यात्रा व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवन को पूर्णता प्रदान करती है।
विचारगोष्ठी में अच्छेलाल, करुणा, गौतमी, समिधा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन सोन संगम के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय दुबे द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।




