Sonbhadra News : घोरावल विधायक ने फीता काटकर किया पंचशील ब्लड बैंक का उद्घाटन

घोरावल विधायक डॉ0 अनिल कुमार मौर्या और जिला पंचायत सदस्य चुर्क मोहन कुशवाहा ने आज छपका स्थित पंचशील हॉस्पिटल फीता काटकर ब्लड बैंक का शुभारंभ किया। इस दौरान घोरावल विधायक ने रक्तदान करने.....

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10:51 PM, March 1, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । घोरावल विधायक डॉ0 अनिल कुमार मौर्या और जिला पंचायत सदस्य चुर्क मोहन कुशवाहा ने आज छपका स्थित पंचशील हास्पिटल में फीता काटकर ब्लड बैंक का शुभारंभ किया। इस दौरान घोरावल विधायक ने रक्तदान करने वाले लोगों की हौसला अफजाई की। उन्होंने कहा कि पंचशील हास्पिटल प्रबंधन की तरफ से जरूरतमंदों को मुसीबत की घड़ी में जान बचाने के लिए रक्तदान जैसे पुनीत कार्य करना लोक कल्याणकारी कार्य है।

बताते चलें कि जिले के हॉस्पिटलों में डेंगू, मलेरिया, गर्भवती महिलाओं, आग से जले व्यक्ति, सड़क दुर्घटना में घायल आदि के मरीज बड़ी संख्या में आते हैं। जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के अतिरिक्त दो अन्य निजी ब्लड बैंक भी स्थापित हैं बावजूद इसके ब्लड और प्लेटलेट्स की कमी की वजह से मरीजों के परिजनों को वाराणसी तक की दौड़ लगानी पड़ती है, ऐसे में अब पंचशील हॉस्पिटल में 100 यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक की स्थापना होने से मरीजों को बहुत सहूलियत मिलेगी। वहीं उद्घाटन के अवसर पर जिला पंचायत सदस्य चुर्क मोहन कुशवाहा, हॉस्पिटल डॉयरेक्टर पवित मौर्या, संस्था प्रमुख डॉ0 अंजनी कुमार सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ0 अनुपमा मौर्या, अस्पताल अधीक्षक डॉ0 सतीश कुमार सिंह, डॉ0 दीप नारायण, डॉ0 शुभम सिंह इत्यादि लोगों ने अपना रक्तदान किया।

घोरावल विधायक डॉ0 अनिल कुमार मौर्या ने बताया कि "ब्लड बैंक के उद्घाटन से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि गरीब से गरीब व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिले, इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है।"

इस अवसर पर अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने विधायक का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधायक के प्रयास से अस्पताल में ब्लड बैंक की स्थापना हुई है, जिससे जिले के जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों जरूरत हो सकेगी पूरी -

हॉस्पिटल प्रमुख डॉ0 अंजनी सिंह कुशवाहा ने बताया कि "ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड की परत दर परत को अलग किया जाता है। इसके बाद आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल लिया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी कर सकती है।"

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