Sonbhadra News : संघर्ष से सफलता तक... योगी सरकार की योजना बनी संजू के सपनों की उड़ान, मिलेट्स कारोबार से बदली जिंदगी
कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहा एक परिवार, आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन चुका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं का सहारा मिलने के बाद रॉबर्ट्सगंज......

AI जनरेटेड बैनर......
sonbhadra
4:37 PM, July 21, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहा एक परिवार, आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन चुका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं का सहारा मिलने के बाद रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के सजौर ग्राम पंचायत के मजरा मझिगांव चौबे की रहने वाली संजू कुशवाहा ने न केवल अपनी तकदीर बदली, बल्कि अपने साथ कई अन्य महिलाओं के जीवन में भी खुशहाली की नई रोशनी जगा दी। आज संजू द्वारा तैयार किए जा रहे मिलेट्स (श्रीअन्न) से बने बिस्कुट, कुकीज, नमकीन और लड्डू स्थानीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और उनका स्वरोजगार सफलता की नई कहानी लिख रहा है।
संजू ने बताया कि "साल 2020 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद वह ने विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर खाद्य प्रसंस्करण एवं मिलेट्स उत्पाद तैयार करने की आधुनिक तकनीक सीखी। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने दिसंबर 2024 में एनआरएलएम से 20 हजार रुपये का ऋण लेकर छोटे स्तर पर अपना कारोबार शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी। उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंच बनाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी। मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि देखते ही देखते उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ने लगी और आज स्थानीय बाजार में उनके मिलेट्स उत्पाद लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं।"
संजू की सफलता से प्रेरित होकर उनके स्वयं सहायता समूह से आठ महिलाएं भी जुड़ गईं। आज ये महिलाएं उत्पादन कार्य में भागीदारी निभाते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला औसतन 10 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही है, जबकि संजू स्वयं सभी खर्चों के बाद 20 हजार रुपये से अधिक मासिक आय प्राप्त कर रही हैं।
संजू आगे बताती हैं कि "एक समय ऐसा था जब पति की निजी नौकरी से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। तीन बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया था। लेकिन एनआरएलएम के सहयोग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज उनकी बड़ी बेटी लखनऊ में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है, जबकि दोनों अन्य बच्चों को भी बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।"
संजू का कहना है कि "यदि उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का साथ नहीं मिला होता तो शायद वह कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पातीं। अब उनका लक्ष्य आधुनिक मशीनें लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ाना और अपने मिलेट्स उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है।"




