Sonbhadra News : 16 फरवरी से 10 वर्ष तक के 2.10 लाख बच्चों को लगेगी एमआर वैक्सीन, स्कूलों में चलेगा अभियान
जिले में खसरा और रूबेला (एमआर) के खात्मे के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत आगामी 16 से 27 फरवरी तक विशेष एमआर अभियान चलाया जाएगा। आज सीएमओ कार्यालय में........

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते सीएमओ डॉ0पंकज कुमार राय......
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4:42 PM, February 12, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में खसरा और रूबेला (एमआर) के खात्मे के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत आगामी 16 से 27 फरवरी तक विशेष एमआर अभियान चलाया जाएगा। आज सीएमओ कार्यालय में आयोजित बैठक में सीएमओ डॉ0 पंकज कुमार राय ने जिला प्रतिरक्षण अधिकारी सहित संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। इस अभियान को लेकर जिले के 2430 सरकारी/प्राइवेट शिक्षण संस्थानों (स्कूल, मदरसे इत्यादि) में अध्ययनरत कक्षा एक से पांच तक के 210612 बच्चों को एमआर वैक्सीन की डोज से आच्छादित किया जायेगा।
एम-आर टीकाकरण से बच्चे होंगे सुरक्षित -
सीएमओ डॉ0 पंकज कुमार राय ने बताया कि "एम-आर टीकाकरण के माध्यम से न केवल बच्चों को सुरक्षित किया जा सकता है, बल्कि समाज को भी इन रोगों से मुक्त बनाया जा सकता है। अभियान के दायरे में जिले के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थान, स्कूल और मदरसे आएंगे। यहां 5 से 10 वर्ष की आयु के 2.10 लाख बच्चों को कवर किया जाएगा। प्रत्येक एएनएम को प्रतिदिन 100 से 125 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है, इसके लिए 310 टीमें बनाई गई है। टीकाकरण टीमें स्कूल पहुंचने से एक दिन पहले ही सूचना देंगी। किसी भी बच्चे को खाली पेट टीका नहीं लगाया जाएगा। स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील या लंच कराने के बाद ही वैक्सीन दी जाए। उन्होंने अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन एवं समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि जिले को खसरा-रूबेला मुक्त बनाया जा सके। बता दें कि खसरा में तेज बुखार, खांसी और बहती नाक, आंखें लाल होना, चेहरे व शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।"
खसरा और रूबेला दोनों ही खतरनाक संक्रामक रोग -
वहीं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ0 गिरधारी लाल ने बताया कि "खसरा और रूबेला दोनों ही अत्यंत संक्रामक रोग हैं, जो बच्चों में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं। एम-आर टीका बच्चों को रोगों से सुरक्षित रखने में अत्यंत प्रभावी एवं सुरक्षित है। खसरा से निमोनिया, डायरिया, कुपोषण और दृष्टिहीनता जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। वहीं, रूबेला संक्रमण गर्भवती महिलाओं में होने पर जन्मजात विकृतियों का कारण बन सकता है।"




