Sonbhadra News : तीज के रंग में सराबोर हुईं सखियां, गीत-संगीत और नृत्य ने बांधा समां
हरतालिका तीज के पर्व पर रॉबर्ट्सगंज स्थित होटल अरिहंत में आज महिलाओं के उल्लास और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।

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6:43 PM, September 11, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र। हरतालिका तीज के पर्व पर रॉबर्ट्सगंज स्थित होटल अरिहंत में आज महिलाओं के उल्लास और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजक इशिका चौबे के संयोजन में आयोजित तीज महोत्सव में सोलह शृंगार और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने गीत-संगीत और नृत्य के बीच पर्व की खुशियां साझा कीं। तीज के लोकगीतों की गूंज और महिलाओं के कदमों की थिरकन से पूरा माहौल उत्सव के रंग में रंग गया।
कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही तीज के पारंपरिक गीतों का दौर चला तो महिलाएं खुद को थिरकने से रोक नहीं सकीं। ‘झूला पड़े अमवा की डार, सखी चलो मनाएं तीज त्योहार’ जैसे लोकगीतों पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। वहीं ‘सावन आयो रे, सखियां झूला झूलें’ की धुन पर सामूहिक नृत्य ने समारोह में चार चांद लगा दिए।
सोलह श्रृंगार में सजी महिलाओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास आकर्षण दिया। गीत-संगीत के बीच हंसी-ठिठोली और आपसी मेल-मिलाप का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
लोक संस्कृति को सहेजने का अवसर - इशिका
आयोजक इशिका चौबे ने कहा कि "हरतालिका तीज केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए आपसी जुड़ाव, उल्लास और लोक परंपराओं को जीवंत रखने का अवसर भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।"
तीज ने दिलाई बचपन की याद - शीतल दहलान
शीतल दहलान ने कहा कि "तीज का पर्व महिलाओं के जीवन में विशेष उत्साह लेकर आता है। गीत, झूले, सोलह शृंगार और सखियों के साथ मिलकर उत्सव मनाने की परंपरा आज भी उतनी ही खूबसूरत है। इस तरह के आयोजन पुरानी यादों को ताजा करने के साथ महिलाओं को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।"
गीत-संगीत से जीवंत हुई परंपराएं - कुसुम शर्मा
कुसुम शर्मा ने कहा कि "तीज के लोकगीतों और पारंपरिक परिधानों में हमारी संस्कृति की खूबसूरती छिपी है। आधुनिक दौर में ऐसे आयोजन हमारी लोक परंपराओं को जीवंत रखने का बेहतर माध्यम हैं। महिलाओं का एक साथ जुटना और मिलकर तीज मनाना बेहद सुखद अनुभव रहा।"
महोत्सव में किरन त्रिपाठी, शशिबाला सिंह, पुष्पा श्रीवास्तव, वीना श्रीवास्तव, मधु मौर्या, सुनीता सान्याल, साधना सारंग और जय श्री विश्वकर्मा समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।




