Sonbhadra News : श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती
ओबरा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 155 वीं एवं पूर्व प्रधानमन्त्री स्व0 लाल बहादुर शास्त्री जी की 120वीं जयन्ती समारोह श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।

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5:25 PM, October 2, 2024
कृपा शंकर पांडेय (संवाददाता)
◆ गांधी जी की लोकतांत्रिक लड़ाई के प्रमुख हथियार थे सत्य और अहिंसा
ओबरा (सोनभद्र) । ओबरा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 155 वीं एवं पूर्व प्रधानमन्त्री स्व0 लाल बहादुर शास्त्री जी की 120वीं जयन्ती समारोह ओबरा ताप विद्युत गृह के गांधी मैदान में श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर ओबरा ताप विद्युत गृह के मुख्य अभियन्ता इं0 आर0के0 अग्रवाल ऐतिहासिक गांधी मैदान पहुंचे और गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर एकत्रित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए आर0के0 अग्रवाल ने गांधी जी के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला एवं बताया की कैसे वह शुरुआती असफलता से हार न मान सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलते हुए सफलता को प्राप्त किया। गांधी जी सर्वधर्म सम्भाव को मानने वाले थे। उनका मानना था कि देश व समाज का निर्माण प्रेम व सद्भाव से होता है घृणा से नहीं। उनका कार्यक्षेत्र स्वतंत्रता आन्दोलन तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने तत्कालीन सामाजिक बुराई अस्पृष्यता के विरोध में अभियान चलाया। इसके साथ ही वे ग्रामोत्थान कार्य में भी सक्रिय रहे। इस दौरान कुटीर उद्योग व चरखे का प्रचार किया। गांधी जी की लोकतांत्रिक लड़ाई के प्रमुख हथियार सत्य और अहिंसा थे, जो बाद में विश्व में कहीं भी चलाये जा रहे आन्दोलनों के प्रेरणा स्रोत बने। उनके जन्मदिन 2 अक्टूबर को अर्न्तराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। जो उनके द्वारा किये गये कार्यों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है। उन्होंने उपस्थित प्रबुद्धजनों को गांधी जी के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख दी। वही आज ही के दिन हमारे देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व0 लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म वाराणसी के रामनगर में एक अत्यन्त साधारण परिवार में हुआ था। उनका प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षमय था। उनके अन्दर देश प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी थी। 17 वर्ष की अल्पायु में ही गांधी जी के आह्वाहन पर पढ़ाई छोड़कर असहयोग आन्दोलन में कूद पड़े थे। सादगी, ईमानदारी, दृढ़संकल्प, शुद्ध आचरण, परिश्रमी, उच्च आदर्षो में आस्था रखने वाले एवं सजग व्यक्तित्व के धनी शास्त्री जी का मानना था कि देश की स्वायत्तता एवं सम्पन्नता में जवानों व किसानों की भूमिका विशेष होती है, इसलिए इन्हें सम्मान मिलना चाहिए। शास्त्री जी का नारा था ‘जय जवान-जय किसान’ जो उनकी नीतियों को प्रकट करता है। इस अवसर पर समारोह में ओबरा परियोजना के मुख्य अभियन्ता (ब) इं0 राज कुमार गुप्ता, मुख्य अभियन्ता (स) इं0 एस0के0 सिंघल, मुख्य अभियन्ता (जानपद) इं0 दिवाकर स्वरूप, मुख्य अभियन्ता (कोल) इं0 वाई0के0 गुप्ता, मुख्य अभियन्ता (प्रशासन) इं0 तुलसी दास, समादेष्टा सीआईएसएफ एस0के0 सिंह, सीएमओ ए0के0 गुप्ता, अधीक्षण अभियन्तागण इं0 ए0के0 राय, इं0 डी0के0 सिंह, इं0 के0एस0 सचान, इं0 अच्युतेष कुमार, इं0 रमाकान्त, इं0 संजय पाण्डेय, इं0 विनोद कुमार, उप महाप्रबन्धक (लेखा) अखिलेष त्रिपाठी, एसएओ दीपक कुमार, अधिशासी अभियन्तागण इं0 सदानन्द यादव, इं0 अजय भारती एवं परियोजना के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।




