Sonbhadra News : महंगा टोल, जानलेवा सड़क! वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर बने 'मौत के कुंड' में फंसकर पलटा ट्रेलर , घंटों लगा जाम
वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर इन दिनों सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और उनमें भरा बारिश का पानी वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क पर पानी भरने के बाद गड्ढों....

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3:53 PM, August 22, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर इन दिनों सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और उनमें भरा बारिश का पानी वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क पर पानी भरने के बाद गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है और यहीं वजह है कि आए दिन वाहन हादसों का शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला उस समय सामने आया, जब गहरे गड्ढे में फंसकर एक ट्रेलर बीच सड़क पर पलट गया। हादसे के बाद मार्ग पर लंबा जाम लग गया। घंटों की मशक्कत के बाद जेसीबी की मदद से ट्रेलर को हटाकर सड़क किनारे कराया जा सका, तब जाकर यातायात सुचारु हो सका।
115 किलोमीटर के सफर में टोल बढ़ा, बदले में बढ़े गड्ढे -
वाराणसी से शक्तिनगर को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर पिछले पांच वर्षों में टोल शुल्क में करीब 50 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। यह मार्ग प्रदेश के महंगे टोल वाले मार्गों में गिना जाता है। दावा है कि प्रदेश के अधिकांश टोल करीब दो रुपये प्रति किलोमीटर की दर से शुल्क लेते हैं, जबकि वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर टोल करीब 3.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से वसूला जा रहा है। इसके बावजूद सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है। टोल वसूली के बीच सड़क के रखरखाव पर उठते सवाल अब राहगीरों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
80 किलोमीटर में 12 ब्लैक स्पॉट, फिर भी इंतजाम नाकाफी -
वाराणसी से शक्तिनगर को जोड़ने वाला यह मार्ग मिर्जापुर के नरायनपुर से सोनभद्र के हाथीनाला तक करीब 115 किलोमीटर लंबा है। सोनभद्र की सीमा में आने वाले लगभग 80 किलोमीटर हिस्से में 12 ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। इसके अलावा जगह-जगह बने गहरे गड्ढे बारिश के दिनों में और खतरनाक हो गए हैं। सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वाहन चालकों के सामने हर मोड़ और हर गड्ढा संभावित हादसे का खतरा बनकर सामने आ रहा है।
तीन टोल बूथ से शुरू हुआ सफर, अब बढ़ता गया शुल्क -
इस मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी एसीपी टोलवेज के पास है। पहले नरायनपुर के फत्तेपुर, रॉबर्ट्सगंज के लोढ़ी और हाथीनाला के मालोघाट में तीन टोल बूथ बनाए गए थे। कार, जीप और वैन जैसे छोटे वाहनों से पूरे मार्ग पर करीब 300 रुपये टोल वसूला जाता था।
इसके बाद वर्ष 2022 में कंपनी ने घाटे का हवाला देते हुए सुकृत घाटी के आगे अहरौरा में अस्थायी टोल बैरियर लगा दिया। इसके जरिए उन वाहनों से भी टोल वसूली शुरू की गई, जो नरायनपुर की बजाय अहरौरा से चुनार अथवा अन्य मार्गों की ओर जाते हैं। यानी टोल वसूली का दायरा बढ़ता गया, लेकिन सड़क की हालत सुधारने की रफ्तार सवालों के घेरे में है।
बारिश में गड्ढे बन रहे 'मौत के कुंड' -
बारिश के दौरान सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को उनकी गहराई और वास्तविक स्थिति का पता ही नहीं चल पाता। तेज रफ्तार वाहनों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। अचानक गड्ढा सामने आने पर वाहन का संतुलन बिगड़ने से पलटने और गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ट्रेलर पलटने की घटना ने एक बार फिर सड़क की सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि टोल वसूली में कोई ढिलाई नहीं बरती जाती, लेकिन सड़क की मरम्मत और नियमित रखरखाव के मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। लोगों का कहना है कि जब वाहन चालकों से भारी भरकम टोल लिया जा रहा है तो बदले में सुरक्षित और गड्ढामुक्त सड़क उपलब्ध कराना भी जिम्मेदार एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।




