Sonbhadra News : जल-जंगल-जमीन बचाने में Gen-Z व Gen-Alfa की एंट्री, प्रशासन के लिए बढ़ी मुसीबत
आदिवासी Gen-Z व Gen-Alfa के इस आंदोलन में उतरने के बाद इस आंदोलन में और मजबूती और तेजी आने की उम्मीद है।

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8:31 AM, September 17, 2026
शांतनु कुमार/अवधेश पटेल
जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए आदिवासी Gen-X लगातार संघर्ष कर रहे हैं। अब तक Gen-X के संघर्ष ने प्रशासन को परेशान कर रखा था लेकिन अब प्रशासन को कड़ी चुनौती देने के लिए Gen-Z और Gen-Alfa की एंट्री हो गयी है। आपको बता दें कि आदिवासी विंध्य एक्सप्रेस-वे से लेकर सोनभद्र में लगने वाले उन परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं जो जंगल को उजाड़ कर स्थापित होंगे।
आदिवासी Gen-Z व Gen-Alfa के इस आंदोलन में उतरने के बाद इस आंदोलन में और मजबूती और तेजी आने की उम्मीद है। Gen-Z व Gen-Alfa ने अपने आंदोलन की शुरुआत रावर्ट्सगंज विधानसभा के नगवा ब्लाक से कर दी है।
'पेड़ हैं तो प्राण हैं' के नारे के साथ आदिवासी Gen-Z व Gen-Alfa ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जंगल उजाड़ने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील की कि जल-जंगल-जमीन को न उजाड़ा जाय।
विनय कुमार गोंड ने कहा कि जल-जंगल-जमीन हमारे पुरखो की विरासत है, इसे तहस नहस न किया जाय अन्यथा हम सभी लोग सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
वहीं गणेश गोंड ने कहा कि जल-जंगल हमारी विरासत है, हम इसकी पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं मगर किसी को उजाड़ कर किसी चीज की स्थापना करना कहाँ का न्याय है। वहीं प्रिया गोंड ने प्रधानमंत्री से निवेदन की कि हमारे जल-जंगल-जमीन और पहाड़ को न बचा लें। उनका कहा है कि यदि पेड ही नहीं रहेंगे तो आदिवासियों का जाय अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा ।
सन्तोष गोंड ने कहा कि जल-जंगल-जमीन हमारी पहचान है इसे तहस-नहस न किया जाय। सूर्य प्रकाश खरवार ने कहा कि जल-जंगल-जमीन से हमारी अस्मिता जुड़ी है इसके लिए जीवन दे देंगे लेकिन इसे कटने नहीं देंगे। वहीं गुरुजी चेरो ने कहा कि हमारे पूर्वज की धरती को कोई नष्ट करेगा तो हम सब उसके खिलाफ खड़े होने में बिल्कुल समय नहीं लगेगा ।
इस कार्यक्रम में बसमतिया चेरो, मुन्नी खरवावार, बैजनाथ, बाबूलाल, रामचन्दर सहित सैकड़ों Gen-Z व Gen-Alfa मौजूद रहे।
कुल मिलाकर दिल्ली से शुरू हुआ Gen-Z आंदोलन ने पूरे देश में Gen-Z और Gen-Alfa को जगा कर रख दिया है। जिस तरह से अब जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए Gen-Z और Gen-Alfa की एंट्री हुई है ऐसे में प्रशासन के लिए उन्हें संभलना मुश्किल होगा। ऐसे में प्रशासन को अब नई रणनीति बनानी पड़ेगी।




