Sonbhadra News : टीबी मरीजों के हक पर सिस्टम का 'ग्रहण', नौ माह से खाते में नहीं पहुँचा सरकारी सहारा
सरकार टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के पोषण के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद ही सिस्टम की सुस्ती की भेंट चढ़ गई है।

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8:27 PM, September 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । एक तरफ सरकार टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के पोषण के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद ही सिस्टम की सुस्ती की भेंट चढ़ गई है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिलने वाला मासिक पोषण भत्ता पिछले नौ माह से बंद है। जिले में उपचाराधीन करीब 2800 टीबी मरीज हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये के लिए इंतजार कर रहे हैं। हालत यह है कि कई मरीज भुगतान की जानकारी लेने के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
टीबी का इलाज केवल दवाओं से पूरा नहीं होता, मरीज को पौष्टिक भोजन की भी जरूरत होती है। इसी उद्देश्य से शासन की ओर से उपचार अवधि में मरीजों को प्रतिमाह एक हजार रुपये की पोषण सहायता डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। लेकिन महीनों से भुगतान नहीं होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के सामने दवा के साथ पोषण जुटाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
दवा मिल रही, पोषण के पैसे का पता नहीं -
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को टीबी की दवाएं तो उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन पोषण भत्ते के भुगतान की व्यवस्था लंबे समय से ठप है। दूध, दाल, अंडा, घी, मूंगफली, चना और सूखे मेवे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ पहले ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऐसे में गरीब मरीजों के लिए इनका नियमित सेवन करना मुश्किल होता जा रहा है।
वहीं मरीजों का कहना है कि इलाज के दौरान शरीर को मजबूत रखने के लिए पौष्टिक भोजन बेहद जरूरी है, लेकिन जब सहायता राशि ही नहीं मिल रही तो अतिरिक्त खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सरकार टीबी उन्मूलन का लक्ष्य लेकर चल रही है तो मरीजों के पोषण की बुनियादी जरूरत महीनों तक क्यों अटकी है?
जनवरी से भुगतान ठप, पोर्टल की तकनीकी दिक्कत से बढ़ी परेशानी -
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीज का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण होने के बाद उपचार अवधि में प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। सामान्य तौर पर उपचार छह से नौ माह तक चलता है। लेकिन जिले में जनवरी 2026 से पोषण भत्ते का भुगतान ठप है।
स्वास्थ्य विभाग इसके पीछे निक्षय पोर्टल के अपडेट और तकनीकी दिक्कतों को वजह बता रहा है। विभाग का कहना है कि पोर्टल पर मरीजों का डेटा अपडेट किया जा रहा है और समस्या दूर होने के बाद लंबित राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सवाल यह है कि तकनीकी खामी का खामियाजा आखिर मरीज क्यों भुगतें?
60 फीसदी डेटा अपडेट, बाकी मरीजों का इंतजार बरकरार -
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने बताया कि "निक्षय पोर्टल पर मरीजों के फीड अपडेट करने की प्रक्रिया चल रही है। करीब 60 प्रतिशत मरीजों का डेटा अपलोड किया जा चुका है और उम्मीद है कि जल्द ही भुगतान प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
लेकिन विभाग की इस उम्मीद के बीच मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। नौ माह से भत्ते का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए अब सवाल सिर्फ भुगतान का नहीं, बल्कि बकाया राशि कब मिलेगी और कितनी मिलेगी, यह भी बना हुआ है।"
11 केंद्रों पर इलाज, 26 केंद्रों पर जांच की सुविधा -
जिले में टीबी मरीजों के उपचार के लिए करमा, केकराही, बभनी, चोपन, डिबुलगंज, दुद्धी, कोन, घोरावल, चतरा, नगवां समेत 11 ट्रीटमेंट यूनिट संचालित हैं। वहीं जिले में 26 केंद्रों पर टीबी जांच की सुविधा उपलब्ध है। इनमें 15 केंद्रों पर आधुनिक सीबी-नाट मशीन से जांच की जाती है।




