Sonbhadra News : सीएमओ के आदेश को ठेंगा दिखा रहे चिकित्सक, तबादले के एक माह बाद नई तैनाती स्थल पर नहीं दिया योगदान
अरे जनाब, यह देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र है......यहां कागज पर तो स्वास्थ्य व्यवस्था चकाचक दिखती है, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही हकीकत सामने आ जाती है। कहीं डॉक्टर साहब हैं ही नहीं........

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sonbhadra
1:21 PM, August 25, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । अरे जनाब, यह देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र है......यहां कागज पर तो स्वास्थ्य व्यवस्था चकाचक दिखती है, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही हकीकत सामने आ जाती है। कहीं डॉक्टर साहब हैं ही नहीं, कहीं डॉक्टर हैं तो नए तैनाती स्थल पर जाने को तैयार नहीं और कहीं तबादला आदेश निकलने के बाद भी पुराने ठिकाने से रवानगी नहीं हो रही। अब इसे क्या कहेंगे, सरकारी आदेश की अनदेखी या फिर विभागीय व्यवस्था की मजबूरी? हालात यह हैं कि जिले में पहले से डॉक्टरों की कमी के बीच 22 चिकित्सकों के स्थानांतरण का आदेश भी करीब एक महीने बाद तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सका है और इसका खामियाजा दूर-दराज से इलाज की आस लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
22 डॉक्टरों का तबादला, फिर भी व्यवस्था जस की तस -
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने 23 जुलाई को 22 चिकित्सकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए थे। उम्मीद थी कि चिकित्सकों की कमी वाले स्वास्थ्य केंद्रों को राहत मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध होगा लेकिन आदेश जारी हुए करीब एक माह बीतने के बावजूद कई चिकित्सकों के नए तैनाती स्थल पर योगदान नहीं करने की जानकारी सामने आ रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई चिकित्सक अभी तक पुराने तैनाती स्थल से कार्यमुक्त नहीं हुए हैं। ऐसे में जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की जरूरत थी, वहां कमी बनी हुई है।
डॉक्टरों की कमी, मरीजों की बढ़ी परेशानी -
जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल बड़ा है और बड़ी आबादी ग्रामीण एवं दूरस्थ इलाकों में रहती है। ऐसे में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की मौजूदगी बेहद जरूरी है। लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को उपचार के लिए जिला मुख्यालय अथवा निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति किसी मुसीबत से कम नहीं है। सरकारी अस्पताल इसलिए बनाए गए हैं कि ग्रामीणों को उनके नजदीक उपचार मिल सके, लेकिन जब डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होंगे तो अस्पताल की इमारत और संसाधन मरीजों के किस काम आएंगे?
कागज पर तबादला, जमीन पर पुरानी व्यवस्था -
सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि जब शासन स्तर से स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं और सीएमओ स्तर से बाकायदा स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है, तो फिर एक महीने बाद भी आदेश का पूरा अनुपालन क्यों नहीं हो पाया? यदि किसी चिकित्सक को कार्यमुक्त करने में नियम-कायदे आड़े आ रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारी स्थिति स्पष्ट करें। और यदि आदेश के बावजूद जानबूझकर देरी हो रही है तो फिर ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना भी जरूरी है।
सीएमओ ने दिए सख्त निर्देश -
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को स्थानांतरण आदेशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरित चिकित्सकों को शीघ्र नए कार्यस्थल पर योगदान करना होगा। संबंधित अधीक्षकों को भी चिकित्सकों को कार्यमुक्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।




