Sonbhadra News : गांव तक सड़क पहुंचा दीजिए डीएम साहब, सात किलोमीटर मार्ग के लिए बड़ुआरी के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
विकास के दावे तो तमाम किये जाते हैं लेकिन ज्यादतर विकास कागजों पर ही नजर आते हैं। चिराग तले अंधेरा की कहावत सोनभद्र के बड़ुआरी ग्राम पंचायत में बिल्कुल फिट बैठती है ।

sonbhadra
10:15 PM, September 10, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । विकास के दावे तो तमाम किये जाते हैं लेकिन ज्यादतर विकास कागजों पर ही नजर आते हैं। चिराग तले अंधेरा की कहावत सोनभद्र के बड़ुआरी ग्राम पंचायत में बिल्कुल फिट बैठती है । विकास की तस्वीर देखनी हो तो बड़ुआरी ग्राम पंचायत में देख सकते हैं, जहाँ टोला-नडोरा, बसौली चुड़ार और टोला-दनही के ग्रामीण आज भी एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। कलेक्ट्रेट से सटे इस गाँव में करीब सात किलोमीटर सड़क के लिए ग्रामीणों को वर्षों से अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं, लेकिन सड़क अब तक कागजों और आश्वासनों से बाहर नहीं निकल सकी।
ग्रामीण सोनी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना-पत्र में अपनी बदहाली का पूरा ब्यौरा रखते हुए सड़क निर्माण के लिए तत्काल कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि खुशबू बाग नर्सरी तक ही मार्ग उपलब्ध है, इसके बाद करीब सात किलोमीटर का सफर पहाड़ी रास्तों और पगडंडियों के सहारे तय करना पड़ता है।
बरसात में सड़क नहीं, आफत बन जाता है रास्ता -
बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं। कच्चा और दुर्गम रास्ता कीचड़, फिसलन और जोखिम में बदल जाता है। बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी परीक्षा से कम नहीं है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना हो। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के अभाव में एंबुलेंस और अन्य वाहन बस्तियों तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को भी पहाड़ी रास्तों के सहारे ले जाने की मजबूरी बनी हुई है।
सड़क नहीं तो शिक्षा भी अधर में लटका -
सड़क की बदहाली का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। माध्यमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ता है। खराब और असुरक्षित रास्ते के कारण बच्चों का नियमित आवागमन प्रभावित होता है। ग्रामीणों ने खास तौर पर बालिकाओं की शिक्षा को लेकर चिंता जताई है। यानी सड़क का अभाव सिर्फ विकास को रोक नहीं रहा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की जिंदगी और ग्रामीणों के भविष्य पर भी भारी पड़ रहा है।
प्रार्थना-पत्रों का ढेर, सड़क का नहीं खत्म हुआ इंतजार -
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को प्रार्थना-पत्र दिए जा चुके हैं। मार्ग की स्थिति से भी प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार ऐसी रही कि सड़क आज भी जमीन पर नजर नहीं आई।
ग्रामीणों ने खुशबू बाग नर्सरी से नडोरा एवं दनही तक करीब सात किलोमीटर मार्ग का तत्काल स्थलीय निरीक्षण और सर्वे कराने की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान किसमती, प्रमिला, पवन कुमारी, भगवंती, फूलवंती, मोना, ममता, शिवानी, रामप्रसाद सिंह गोंड, राम मनोज, धर्मदेव, सिकंदर, विनोद कुमार, सरोज, बच्चालाल, गुलाब सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
"बहरहाल बड़ुआरी ग्राम पंचायत में सड़क की मांग ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल कर रख दी। कलेक्ट्रेट से कुछ ही दूरी पर बसे इस गांवों के लोगों को आज सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं।"




