एक ताजा मामला प्रकाश में आया है, जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी बद्री नाथ सिंह 05 अगस्त 2025 के अपने एक आदेश में लिखा कि मे० ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड, ग्राम-खेबन्धा के आराजी संख्या-246 (खण्ड-स) रकबा 7.000 हे० क्षेत्र की जाँच राजस्व लेखपाल खेबन्धा, सर्वेक्षक खनिज विभाग, ज्येष्ठ खान अधिकारी सोनभद्र, पुलिस क्षेत्राधिकारी ओबरा एवं उप जिलाधिकारी ओबरा द्वारा संयुक्त रूप से की गयी । संयुक्त टीम द्वारा 15 जून 2025 को अपनी जाँच आख्या जिलाधिकारी को दिया गया। जिसमें बताया गया कि "जाँच के समय पट्टाधारक द्वारा अपने खनन क्षेत्र से बाहर अनियमित आकार एवं अनियमित गहराई में बालू/मोरम का अवैध खनन एवं परिवहन किया जाना पाया गया। अवैध खनन क्षेत्र में मात्रा का आकलन/पैमाइस जी०पी०एस० हैण्ड हेल्ड मशीन व मापन टेप से किया गया। इसके बाद जिलाधिकारी के आदेश पर पट्टाधारक को पत्र संख्या-541/ खनिज/2025 दिनांक 17 जून 2025 द्वारा कारण बताओ नोटिस भेजा गया। जिसके क्रम में पट्टाधारक द्वारा 11 जुलाई 2025 को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने संयुक्त जांच टीम पर सवाल खड़े करते हुए पूरी कार्यवाही को गलत बताया था । लेकिन जिलाधिकारी ने पट्टाधारक की दलील को खारिज करते हुए जांच टीम की रिपोर्ट के सही ठहराया और पट्टाधारक मे० ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किये गये उप खनिज बालू/मोरम के अवैध खनन की मात्रा 9.455 घन मी० पर रू0 150/- प्रति घन मी० की दर से रायल्टी की धनराशि रू0 14,18,250/-, खनिज मूल्य की धनराशि रू0 70,91,250/- एवं नियम-58 के अन्तर्गत अर्थदण्ड की धनराशि रू0 5,00,000/- कुल धनराशि रू0 90,09,500/-(रूपये नब्बे लाख नौ हजार पांच सौ मात्र) की पेनाल्टी तय करते हुए 15 दिन में जमा करने के लिए आदेशित किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि तय समय के भीतर धनराशि जमा नहीं की जाती है, तो नियमानुसार वसूली की कार्यवाही की जायेगी।