Sonbhadra News : बिजली विभाग में 'सेटिंग' का करंट! बकायेदार मकान पर दे दिया कनेक्शन, नए मालिक को थमा दिया दो लाख का बिल
बिजली विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला रॉबर्ट्सगंज नगर के दीपनगर पोखरा क्षेत्र का है......

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9:07 PM, June 12, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• जेई की भूमिका पर उठे सवाल, एक हिस्से में कनेक्शन जारी तो दूसरे हिस्से पर थोप दिया लाखों का बकाया
• पीड़िता का आरोप - कनेक्शन मांगने पर शुरू हुआ उत्पीड़न, जनरेटर से कराना पड़ रहा मकान निर्माण
• पीड़िता का आरोप - जे0ई0 आए दिन बिजली चोरी अथवा अन्य मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं।
सोनभद्र । बिजली विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला रॉबर्ट्सगंज नगर के दीपनगर पोखरा क्षेत्र का है, जहां एक ही मकान के एक हिस्से पर कथित रूप से बकाया होने के बावजूद बिजली कनेक्शन जारी कर दिया गया, जबकि दूसरे हिस्से के नए मालिक को कनेक्शन देने के बजाय दो लाख रुपये का बकाया थमा दिया गया।
पीड़िता रीना केशरी ने उच्चाधिकारियों को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि "जिस संपत्ति पर कभी बिजली कनेक्शन, मीटर या वायरिंग तक नहीं थी, उसके एक हिस्से को खरीदने वाले व्यक्ति को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से आसानी से नया कनेक्शन दे दिया गया। हैरानी की बात यह है कि उसी संपत्ति के दूसरे हिस्से पर अब विभाग लाखों रुपये का बकाया दिखाकर नया कनेक्शन देने से इंकार कर रहा है। शिकायत के अनुसार रीना केशरी ने जुलाई 2025 में उक्त संपत्ति का दूसरा हिस्सा खरीदा था। मकान निर्माण के लिए उन्होंने अप्रैल 2026 में झटपट पोर्टल पर दो किलोवाट के नए बिजली कनेक्शन हेतु आवेदन किया। आरोप है कि आवेदन के बाद संबंधित जेई मौके पर पहुंचे और तरह-तरह की आपत्तियां उठाने लगे। जब बात नहीं बनी तो अचानक मकान पर करीब दो लाख रुपये का बकाया दर्शा दिया गया।"
पीड़िता का आरोप है कि कनेक्शन न मिलने के कारण उन्हें मकान निर्माण कार्य जनरेटर के सहारे कराना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, पड़ोस से पानी लेने पर भी दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित जे0ई0 आए दिन बिजली चोरी अथवा अन्य मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं।
मामले के तूल पकड़ने के बाद अधीक्षण अभियंता ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि "बकाया होने के बावजूद कनेक्शन जारी करना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है और यह पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"




