इस दौरान जिलाधिकारी ने समस्त औद्योगिक इकाईयों के प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद किया गया, तथा जनपद में औद्योगिक इकाईयों द्वारा कराये जा रहें सीएसआर के कार्यों के अनुमोदन, स्वीकृति तथा अनुश्रवण के सम्बन्ध में दिशा निर्देश दिये गए। उन्होंने कहा कि कम्पनी अधिनियम 2015 की धारा 135 मे सीएसआर के सम्बन्ध में यह व्यवस्था दी गयी है कि प्रत्येक वह कम्पनी जिसका नेटवर्थ 500 करोड़ या उससे अधिक है अथवा टर्नओवर 1000 करोड़ अथवा अधिक है, अथवा नेट प्रॉफिट 5 करोड़ अथवा अधिक है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में गत तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत सीएसआर के कार्यकलापों में व्यय करना होगा। उन्होने कहा कि सीएसआर गाॅवों व नगरों के विकास में सीएसआर की धनराशि व्यय की जाये कम्पनियों के आस पास बसे गोवों मे बेहतर स्वास्थ्य शिक्षा व जल उपलब्ध कराने हेतु कार्य योजना बनायी जाये जिससे ग्रामीण जनों का बेहतर विकास हो सके। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक हित के कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराये जाये, उपायुक्त उद्योग यह सुनिशिचित कर लें कि उपरोक्त मानको के अन्तर्गत वर्तमान की सीएसआर इकाईयों के अतिरिक्त यदि अन्य कोई इकाई भी सम्मिलित होती हो, तो उसे भी डाटाबेस में ले लिया जाये। जनप्रतिनिधियों तथा एनजीओ व अन्य किसी संस्था से प्राप्त सीएसआर कार्यों के प्रत्येक प्रस्तावों को जिला स्तरीय समिति के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाये, जिला स्तरीय समिति के निर्णय के अतिरिक्त व्यक्तिगत रूप से किसी विभाग/अधिकारी/संस्थान से प्राप्त किसी प्रस्ताव पर औद्योगिक इकाई द्वारा कोई कार्यवाई ना की जाये। इस प्रकार से प्राप्त समस्त प्रस्तावों को जिला स्तरीय समिति के अनुमोदन हेतु अवश्य प्रस्तुत किया जायें, इसका विवरण उपायुक्त उद्योग जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द, सोनभद्र को उपलब्धा कराया जाये, यह विवरण पोर्टल पर भी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।