Sonbhadra News : कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय सहित 19 सूत्रीय मांग को लेकर भाकपा ने पैदल मार्च निकाल डीएम को सौंपा ज्ञापन
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला काउंसिल एवं अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के संयुक्त तत्वाधान में आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के विभिन्न जनहित के मुद्दों......

19 सूत्रीय मांगों को लेकर पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट जाते भाकपा कार्यकर्ता.....
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1:28 PM, August 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला काउंसिल एवं अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के संयुक्त तत्वाधान में आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर जोरदार पैदल मार्च निकाला गया। जिला सचिव कामरेड आर0के0 शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्य में कार्यकर्ताओं ने चुर्क तिराहा से पैदल मार्च निकाल कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित 19 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
खनिज संपदा से समृद्ध सोनभद्र, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का संकट -
इस दौरान जिला सचिव आर0के0 शर्मा ने बताया कि "सोनभद्र देश को ऊर्जा, खनिज और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराने वाला महत्वपूर्ण जनपद है, लेकिन यहां के आदिवासी, किसान, मजदूर और आम नागरिक आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।"
कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय और बभनी में कन्या डिग्री कॉलेज की मांग -
उन्होंने बताया कि भाकपा ने जनपद में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा विकासखंड बभनी में राजकीय कन्या डिग्री कॉलेज खोलने की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
पेसा कानून और जल-जंगल-जमीन पर अधिकार की आवाज -
ज्ञापन में उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पेसा अधिनियम का कड़ाई से पालन कराने, जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों एवं परंपरागत वन निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने तथा वनाधिकार कानून के तहत दावों के निस्तारण तक पात्र लोगों को बेदखल न किए जाने की मांग की गई। वन विभाग और कर्मचारियों पर आदिवासियों व गरीबों के शोषण-उत्पीड़न के लगाए जाने वाले आरोपों पर रोक लगाने की भी मांग की गई।
मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये मजदूरी की मांग -
संगठन ने मनरेगा को प्रभावी रूप से बहाल करते हुए प्रत्येक पात्र परिवार को 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की साथ ही बालू और पत्थर खनन में प्रतिबंधित मशीनों के कथित इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने तथा स्थानीय मजदूरों को खनन कार्य में प्राथमिकता देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा -
भाकपा ने जनपद के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, रिक्त पदों को भरने और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। बभनी-म्योरपुर क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर सहित आधुनिक अस्पताल की स्थापना, सभी जच्चा-बच्चा केंद्रों पर चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टाफ, दवाइयां और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
स्थानीय युवाओं और विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता -
ज्ञापन में स्थानीय उद्योगों और कल-कारखानों में प्रभावित किसानों, विस्थापित परिवारों तथा स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि जनपद की प्राकृतिक और औद्योगिक संपदा का लाभ स्थानीय लोगों को भी मिलना चाहिए।
बिजली कटौती और फर्जी बिलों पर रोक की मांग -
बिजली व्यवस्था को लेकर भी संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। बिजली कटौती और कथित फर्जी बिजली बिलों पर तत्काल रोक लगाने, जर्जर तार-पोल और ट्रांसफार्मर बदलने तथा प्रतिदिन कम से कम 20 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई। इसके अलावा उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई।
सीएसआर और डीएमएफ निधि के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग -
औद्योगिक एवं खनन क्षेत्रों से मिलने वाली सीएसआर और डीएमएफ निधि को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, रोजगार और स्थानीय विकास कार्यों में पारदर्शिता के साथ खर्च करने की मांग की गई। संगठन ने हर घर नल जल योजना का लाभ सभी पात्र परिवारों तक तत्काल पहुंचाने की भी मांग उठाई।
आदिवासी दर्जे समेत पोषण के मुद्दे पर भी जोर -
भाकपा ने कोल, मुसहर, धांगर, धरकार और बियार समुदाय को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग की। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत बच्चों को सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के समान राशन एवं पोषण सामग्री उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
19 मांगों पर तत्काल कार्यवाही की मांग -
भाकपा ने मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर सकारात्मक और प्रभावी कार्यवाही करने की अपेक्षा जताई। संगठन का कहना है कि सोनभद्र के आदिवासी, किसान, मजदूर और ग्रामीण लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, पेयजल और अधिकारों से जुड़े सवालों को उठाते रहे हैं। अब इन मांगों पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्यवाही की जरूरत है।




