Sonbhadra News :विभिन्न मांगों को लेकर भाकपा माले ने किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
विभिन्न मांगों को लेकर भाकपा माले ने किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

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7:58 PM, February 12, 2026
विभिन्न मांगों को लेकर भाकपा माले ने किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
दुद्धी, सोनभद्र। भाकपा माले के तहसील अध्यक्ष बिगन राम गोंड़ की अगुवाई में गुरुवार को तहसील मुख्यालय पर जुलुस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करते हुए तहसील परिसर पहुंचे जहाँ राष्टपति के नाम सम्बोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी कार्यालय के स्टेनो बाबू विजेंद्र सिंह को सौंपा। सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया हैं कि चार लेबर कोड, मनरेगा की जगह लाए गए 'विकसित भारत ग्रामजी' कानून और दूसरे जन विरोधी कदमों के खिलाफ आज 12 फरवरी 2026 को श्रम संगठनों द्वारा बुलाई गई अखिल भारतीय आम हड़ताल में शामिल होकर हम हड़ताल का समर्थन करते हैं।मजदूरों के एक दिन में 'काम के आठ घंटे' का अधिकार, संगठित होने, यूनियन बनाने और अपनी लोकतांत्रिक मांगों के लिए हड़ताल करने जैसे ढेरों कानूनी अधिकारों पर ये चार लेबर कोड कुठाराघात करते हैं। दूसरी ओर, मालिकों और उद्योगपतियों को बहुतेरी मजदूर-विरोधी रियायतें देते हैं। मजदूर वर्ग के ऐतिहासिक संघर्षों, बलिदानों और शहादतों से हासिल पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर लाई गई चारों श्रम संहिताएं दरअसल मजदूरों को फिर से गुलाम बनाने के कानूनी दस्तावेज हैं।मनरेगा कानून, जो सामाजिक कल्याण की दिशा में मील का पत्थर था, को एक झटके में समाप्त कर 'विकसित भारत ग्राम जी' कानून लाया गया है। मनरेगा में काम मांगने और पाने का गरीबों को कानूनी अधिकार था, जबकि नए कानून में यह केंद्र सरकार की मर्जी पर छोड़ दिया गया है। रोजगार गारंटी का' नया कानून साल में व्यस्त खेती के सीजन में 60 दिन 'काम नहीं देने' की गारंटी करता है। भुगतान में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी भी घटा दी गई है। सौ के बजाय सवा सौ दिन काम देने का झांसा दिया गया है। यह मनरेगा कानून ही था, जो कोरोना काल में गरीबों की ढाल बना था। उसे और मजबूत बनाने और कृषि कार्यों से भी जोड़ने की जगह उसे समाप्त करना निहायत जन विरोधी कदम है।बुलडोजर राज, जिसमें गरीब उजाड़े जा रहे हैं, आदिवासी-वनवासी जल-जंगल-जमीन से वंचित किये जा रहे हैं, कई गांवों व किसानों पर बेदखली की तलवार लटक रही है और अल्पसंख्यकों की इबादतगाहों को निशाना बनाया जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद असंवैधानिक रुप से जारी है।इसलिए हम हड़ताल का पुरजोर समर्थन करते हुए आज के प्रतिवाद के माध्यम से निम्न मांग करते है-1. चार लेबर कोड समाप्त कर पुराने श्रम कानून बहाल किये जायें।2. विकसित भारत ग्राम जी कानून वापस लेकर मनरेगा कानून को बहाल किया जाए। मनरेगा में 200 दिन काम और मजदूरी बढ़ा कर 600 रु प्रतिदिन किया जाए। बकाया मजदूरी का भुगतान किया जाए।3. बुलडोजर नीति पर रोक लगाई जाए। गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल बंद हो। वास-आवास, आजिविका, जमीन, जंगल व वनोपज पर आदिवासियों, गरीबों के अधिकारों की गारंटी हो।4. बिजली सेक्टर सहित सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। प्रति माह 200 यूनिट फ्री बिजली दी जाए।5. देश व किसान विरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द किया जाए।इस मौके पर धनेश्वर सिंह, अनिल कुमार,राज कुमार, दीन दयाल, रमेश कुमार,शेरासंह,जयसिंह,प्रभु सिंह,रामजीत,लाल सिंह, श्री किशुन, मदन सहित अन्य उपस्थित रहे।




