Sonbhadra News : सड़क पर जिंदगी-मौत से जूझती गाय को मिला फरिश्ता, आशीष तिवारी ने जनपद न्यूज Live संग बढ़ाया मदद का हाथ
रॉबर्ट्सगंज के उरमौरा के पास सड़क पर एक घायल गाय घंटों तड़पती रही और लोग उसे देखते हुए गुजरते रहे। अज्ञात वाहन की टक्कर से घायल हुई गाय सड़क किनारे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी। इसी दौरान घर.......

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12:32 PM, August 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । रॉबर्ट्सगंज के उरमौरा के पास सड़क पर एक घायल गाय घंटों तड़पती रही और लोग उसे देखते हुए गुजरते रहे। अज्ञात वाहन की टक्कर से घायल हुई गाय सड़क किनारे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी। इसी दौरान घर लौट रहे उरमौरा निवासी आशीष तिवारी की नजर उस पर पड़ी तो उन्होंने जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाते हुए अपना वाहन रोक घायल गाय को बीच सड़क से किनारे करने के लिए मदद के लिए लोगों से गुहार लगाई, लेकिन ना तो मौके पर मौजूद लोगों और ना ही राहगीरों में से किसी ने आगे बढ़कर उसकी मदद नहीं की। आखिरकार आशीष तिवारी ने जनपद न्यूज Live की टीम की मदद से नगर पालिका प्रशासन से संपर्क किया, जिसके बाद घायल गाय को पशु अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के बाद उसे पशु शेल्टर होम भेज दिया गया।
इंसानियत दिखाने वाला एक शख्स, बाकी बने तमाशबीन -
आशीष तिवारी के मुताबिक वह अपने घर जा रहे थे, तभी सड़क पर घायल गाय को तड़पते देखा। गाय की हालत देखकर उन्होंने मौके पर रुककर आसपास के लोगों से मदद की अपील की, लेकिन कोई आगे नहीं आया। उन्होंने बताया कि सड़क पर एक बेजुबान जानवर दर्द से कराह रहा था और लोग उसके पास से गुजरते रहे। इसके बाद उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से संपर्क किया और किसी तरह गाय को उपचार के लिए पशु अस्पताल भेजवाया।
सड़कों पर गोवंश, हादसों का इंतजार कर रहा नगर पालिका प्रशासन -
घटना ने रॉबर्ट्सगंज नगर में आवारा और बेसहारा पशुओं की समस्या को फिर सामने ला दिया है। शहर की सड़कों और प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह घूमते गोवंश न केवल खुद हादसों का शिकार हो रहे हैं, बल्कि वाहन चालकों के लिए भी बड़ा खतरा बने हुए हैं। अचानक सड़क पर आ जाने वाले पशुओं को बचाने के चक्कर में कई बार वाहन अनियंत्रित होने की स्थिति पैदा हो जाती है। वहीं किसी वाहन की टक्कर से घायल होने के बाद यही बेजुबान जानवर घंटों उपचार के इंतजार में सड़क पर पड़े रहते हैं।
घरेलू पशुओं को सड़क पर छोड़ने वालों आखिर कब होगी कार्यवाही -
सबसे बड़ा सवाल उन पशुपालकों पर भी है जो अपने घरेलू पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। आखिर नगर पालिका ऐसे पशुपालकों के खिलाफ नियमित अभियान क्यों नहीं चलाती? क्या जिम्मेदारी सिर्फ घायल पशु को उठाकर शेल्टर होम पहुंचाने तक सीमित है? यदि घरेलू पशुओं को सड़क पर छोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और जुर्माने का अभियान चले तो समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है।
नगर पालिका की व्यवस्था पर आशीष तिवारी ने उठाए सवाल -
आशीष तिवारी का कहना है कि “जब सड़क पर कोई बेजुबान जानवर घायल होकर तड़प रहा हो और लोग उसे देखकर भी आगे निकल जाएं तो यह बेहद दुखद है। नगर पालिका को सिर्फ हादसा होने के बाद पशु को उठाने की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए, बल्कि पहले से सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही जिन लोग अपने घरेलू पशुओं को जानबूझकर सड़कों पर छोड़ते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आए दिन होने वाले हादसों पर रोक लग सके।”
हादसे के बाद जागने की बजाय पहले क्यों नहीं सक्रिय होती व्यवस्था -
यह घटना नगर पालिका की पशु प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की जानकारी लगातार रहती है तो उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नियमित अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा? क्या नगर पालिका प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सवाल सिर्फ एक गाय के घायल होने का नहीं, बल्कि सड़कों पर इंसान और बेजुबान दोनों की सुरक्षा का है।




