सोनभद्र जिले के पटना सिलथम गांव में आज इतिहास और परंपरा का संगम देखने को मिला। जनजाति गौरव दिवस कार्यक्रम में पहुंचे असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य का पारंपरिक करमा नृत्य से भव्य स्वागत किया गया। चारों ओर आदिवासी संस्कृति की झलक और देशभक्ति के स्वर गूंजते रहे। इस दौरान राज्यपाल ने नीलांबर और पीतांबर की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर अपने सम्बोधन में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा कि "आज आदिवासियों, गिरवासियों और वनवासियों का सम्मान वर्तमान शासन में वापस लौटा है। जिस तरह से देश की आजादी का सपना बिरसा मुंडा, नीलांबर, पीतांबर समेत तमाम जनजातीय क्रांतिकारियों ने देखा था वह सपना आज पूर्ण हो रहा है यह दिन हमारे लिए गौरव का दिन है। आज नीलांबर-पीतांबर स्मृति सम्मान समारोह के जरिए इस आदिवासियों की धरती पर जो कार्यक्रम आयोजित हो रहा है वह अपने आप में अद्भुत है। आदिवासी समाज ने देश की आज़ादी में जो योगदान दिया, वह इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीर नीलांबर और पीतांबर का उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में इन दोनों भाइयों ने अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती दी थी। दोनों ने अपने प्राणों की आहुति देकर यह साबित किया कि देशभक्ति किसी वर्ग या जाति की नहीं, बल्कि पूरे भारत की आत्मा है। उन्होंने कहा कि यह जनपद आदिवासी संस्कृति, शौर्य और बलिदान की धरती है। इसी भूमि ने वह वीर दिए जिन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा कि देश की एकता, अखंडता व संप्रभुता के लिए जरूरी है कि हम एक हो कर रहें, हमें तमाम ऐसी तकते हैं जो कमजोर करने की साजिश रचती हैं हमें उनसे सावधान रहना है। उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को जागरूक करने के लिहाज से कहा कि हमारी आपकी एकता राष्ट्र की एकता है।"