Sonbhadra News : सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हमारा दायित्व है - दीपक केसरवानी
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई वाराणसी, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ, मीडिया सेंटर ऑफ़ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत राजा बलदेव दास बिड़ला सोनघाटी इंटरमीडिएट कॉलेज...

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5:57 AM, November 21, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• विश्व धरोहर सप्ताह का हुआ भव्य शुभारंभ
सोनभद्र । क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई वाराणसी, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ, मीडिया सेंटर ऑफ़ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत राजा बलदेव दास बिड़ला सोनघाटी इंटरमीडिएट कॉलेज पटवध, चोपन मे आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित व्याख्यानमाला के अंतर्गत सोनभद्र के सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन, पर्यटन विकास विषय पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-संस्कृत धरोहरों का संरक्षण हमारा दायित्व है,पौराणिक शोण महानद के किनारे अवस्थित सोनभद्र जनपद के 160 करोड़ वर्ष प्राचीन विश्व का प्राचीन सलखन फॉसिल्स पार्क सोनभद्र में समुद्र के अस्तित्व को प्रमाणित करता हैं, यहां के जंगलों में अवस्थित गुफाओं, कंदराओं, पहाड़ों, मे आदिम मानव द्वारा चित्रांकित गुफाचित्र मानव के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक विकास की कहानी चलचित्र की तरह बया करते हैं, आदिमानव के वंशधर आदिवासी जातियां आज भी अपने पुरातन, सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक परंपरा को कायम रखे हुए हैं। सोनभद्र की यही विशेषता इसे विश्व स्तरीय श्रेणी प्रदान करती है। ऐतिहासिक काल के मौर्य, वर्धन, प्रतिहार, गुर्जर, चालुक्य, गहरवार, चंदेल आदि राजवंशों द्वारा निर्मित किले, गढ़ी, तालाब मंदिर आदि वास्तुकला, स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने सोनभद्र के ऐतिहासिक काल की व्याख्या करते हैं। इतिहास के इन प्रमाणिक ऐतिहासिक विरासतों का संरक्षण संवर्धन पर्यटन विकास ऐतिहासिक साक्षी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है, जो अब तक नहीं हो पाया है। यद्यपि सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग द्वारा इन ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण का प्रयास जारी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महान देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा स्थापित सर्वेंट्स आफ इंडिया सोसाइटी के मंत्री आत्मानंद मिश्र ने कहा कि-"इस जनपद की आदिकाल से आधुनिक काल तक की आदिकालीन, पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक महत्व कायम रही है, जटिल भौगोलिक बनावट, प्राकृतिक सौंदर्य के कारण सोनभद्र जनपद को पूरे भारतवर्ष में विशिष्ट स्थान प्राप्त है, आधुनिक तीर्थ की संज्ञा से विभूषित इस जनपद में स्थापित कल- कारखाने इस क्षेत्र को विशेषता प्रदान करते हैं एवं बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ राज्यों की भौगोलिक, राजनीतिक सीमाओं से घिरा यह जनपद भारत का एकमात्र जनपद है एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जनपद है, यह हमारे लिए गर्व का विषय है।
मुख्य वक्ता कठपुतली कला विशेषज्ञ, राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत रंगकर्मी हरिशंकर शुक्ल ने कहा कि-"खनिज पदार्थों, प्राकृतिक संपदाओं, ऐतिहासिक अवशेषों से भरपूर, भगवान शिव की तपोभूमि होने के कारण यहां के कण-कण में शिवत्व, देवत्व व्याप्त है, जिसकी अनुभूति हमें इस क्षेत्र के पर्यटन से होता है। प्राकृतिक सुषमाओ के कारण इसे भारत का स्विट्जरलैंड एवं गोवा की संज्ञा से विभूषित किया है विश्व के सैलानियों ने। अघोर संतो, नागपंथियों की तपोभूमि आदिवासी राजा मदन शाह की राजधानी अघोरी मे अवस्थित ऐतिहासिक विरासत समय कालखंड के परिवर्तन एवं इतिहास की व्याख्या करते हैं।




